The nectar of Ram Katha resonated in Meja, a huge crowd of devotees gathered.
श्री सिद्धेश्वर पहाड़ी महादेव मंदिर परिसर में चल रही राम कथा में पंडित नारायण द्विवेदी ने बताया रामचरित मानस का महत्व, मर्यादित जीवन जीने का दिया संदेश
संवाददाता – नीरज कुमार शर्मा
मेजा, प्रयागराज।:- मेजा क्षेत्र स्थित श्री सिद्धेश्वर पहाड़ी महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनी हुई है। 5 जून से शुरू हुई इस पावन कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीराम की महिमा का श्रवण कर रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक वातावरण से पूरा परिसर राममय हो उठा है।

कथा व्यास पंडित नारायण द्विवेदी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग, धर्म और मानव कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानव समाज के लिए आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा है। वर्तमान कलियुग में जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, ऐसे समय में रामचरित मानस मानव को सही मार्ग दिखाने का कार्य करती है।
पंडित द्विवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने समाज के कल्याण और मानव जीवन को सरल एवं सुखमय बनाने के उद्देश्य से रामचरित मानस की रचना की थी। मानस में वर्णित श्रीराम के आदर्श, सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा आज भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य रामचरित मानस के उपदेशों को अपने जीवन में उतार ले तो उसका जीवन सुख, शांति और सदाचार से भर सकता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान श्रीराम के चरित्र और उनकी जीवन लीलाओं का रसपान कर रहे हैं। कथा व्यास ने उपस्थित भक्तों से आग्रह किया कि वे केवल कथा श्रवण तक सीमित न रहें, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएं। यही सच्ची भक्ति और मानव जीवन की सफलता का मार्ग है।
कार्यक्रम में हरि शंकर मिश्रा, संजय केसरवानी, गप्पू शुक्ला, दशरथ मिश्रा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर भक्तों ने भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
