A sensational revelation in the murder of a Vaishya family in Prayagraj; property, greed, and betrayal claimed four lives; Police solved the mystery within 12 hours.
संवाददाता – आलोपी शंकर शर्मा
Crime Update Prayagraj:– प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में सामने आए चर्चित वैश्य परिवार सामूहिक हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हत्याकांड ने न केवल पारिवारिक रिश्तों की नींव को सवालों के घेरे में खड़ा किया है, बल्कि दोस्ती और भरोसे के मायने भी बदल दिए हैं। जिस बेटे को माता-पिता ने प्यार-दुलार से बड़ा किया, उसी ने कथित तौर पर संपत्ति और पैसों के लालच में अपने दोस्त के साथ मिलकर अपने माता-पिता और बहन की हत्या की साजिश रच डाली। वहीं जिस दोस्त पर उसने सबसे अधिक भरोसा किया, उसी दोस्त ने जेवरों के बंटवारे के विवाद में उसे भी मौत के घाट उतार दिया।

पुलिस के अनुसार साउथ मलाका स्थित कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी पत्नी अनीता वैश्य, बेटी मीनाक्षी वैश्य और बेटे अभिषेक वैश्य की हत्या के मामले का खुलासा 12 घंटे के भीतर कर दिया गया। मामले में गिरफ्तार आरोपी शनि गुप्ता ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
“जो अपने मां-बाप का नहीं हुआ, उस पर कैसे करता भरोसा”
पुलिस पूछताछ में आरोपी शनि गुप्ता ने बताया कि परिवार की हत्या के बाद दोनों ने घर से बड़ी मात्रा में जेवर और कीमती सामान लूट लिया था। लेकिन जब बंटवारे की बात आई तो अभिषेक उसे पूरा हिस्सा देने के बजाय टालमटोल करने लगा।
शनि के मुताबिक, उसने अभिषेक से कहा कि जो व्यक्ति संपत्ति के लिए अपने माता-पिता और बहन का नहीं हो सका, वह दोस्त के साथ ईमानदारी कैसे निभाएगा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। गाली-गलौज और कहासुनी के दौरान गुस्से में आकर शनि ने लोहे की रॉड से अभिषेक के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
दोस्ती की आड़ में रची गई खूनी साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शनि गुप्ता समोसे-कचौड़ी का कारोबार करता था और अभिषेक का वर्षों पुराना दोस्त था। दोनों अक्सर साथ बैठते, शराब पीते और घंटों समय बिताते थे।
इसी करीबी दोस्ती का फायदा उठाकर अभिषेक ने अपने परिवार को रास्ते से हटाने की योजना में शनि को शामिल किया। लेकिन करोड़ों के जेवर और संपत्ति के लालच ने दोस्ती को भी निगल लिया और अंततः दोनों एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।
रविवार शाम रची गई मौत की पटकथा
पुलिस के अनुसार रविवार दोपहर अभिषेक ने शनि को दुकान पर बुलाया। दोनों ने साथ बैठकर कचौड़ी खाई, बीयर पी और सिगरेट पीते हुए हत्या और लूट की योजना बनाई।
शाम करीब पांच बजे रोज की तरह मीनाक्षी दुकान खोलने नीचे आई। जैसे ही उसने सीढ़ियों का दरवाजा खोला, अभिषेक ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर हमला कर दिया। शनि ने भी उसका साथ दिया। गंभीर चोट लगने से मीनाक्षी की मौके पर ही मौत हो गई।
इसके बाद दोनों ऊपर पहुंचे, जहां वीरेंद्र कुमार वैश्य और अनीता वैश्य सो रहे थे। दोनों पर लोहे की रॉड और पाइप से ताबड़तोड़ वार किए गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण दोनों की भी मौके पर मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने घर की अलमारी खंगाली और सोना-चांदी सहित कीमती सामान समेट लिया।
डेढ़ करोड़ के जेवर बने मौत की वजह
परिवार की हत्या के बाद दोनों आरोपी लूटे गए जेवर और नकदी लेकर निकल गए। पुलिस के अनुसार बरामद सामान की कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है।
लेकिन जब जेवरों के बंटवारे की बारी आई तो लालच ने दोस्ती पर भारी पड़ गया। हिस्सेदारी को लेकर हुए विवाद ने चौथे कत्ल की नींव रख दी और शनि ने अभिषेक की भी हत्या कर दी।
पुलिस ने 12 घंटे में खोला राज
प्रयागराज पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि आरोपी शनि गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके कब्जे से लगभग एक किलो सोना, 360 ग्राम चांदी, एक हजार रुपये नकद और घर के ताले की चाबी बरामद हुई है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शनि ने अपने लंबे बाल और दाढ़ी कटवा लिए थे।
संपत्ति विवाद और गलत संगत ने बदली जिंदगी
पुलिस के मुताबिक अभिषेक अपने पिता से नाराज रहता था। वर्ष 2022 में पिता द्वारा उसे संपत्ति से बेदखल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। वह कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था और नशे की लत का शिकार भी बताया जा रहा है।
पड़ोसियों के अनुसार अभिषेक अक्सर दोस्तों के साथ शराब पीता था और छोटी-छोटी बातों पर विवाद करता था। परिवार और रिश्तेदार उसके व्यवहार से परेशान रहते थे। इसके बावजूद माता-पिता को उम्मीद थी कि समय के साथ उसका स्वभाव बदल जाएगा।
जिस बेटे को गोद में खिलाया, उसी ने उजाड़ दिया परिवार
मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों के अनुसार कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य अपने बेटे अभिषेक से बेहद स्नेह करते थे। उन्होंने जीवनभर मेहनत कर कारोबार खड़ा किया और बच्चों के भविष्य को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वही बेटा एक दिन पूरे परिवार के विनाश का कारण बन जाएगा।
प्रयागराज का यह हत्याकांड केवल चार लोगों की हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह लालच, नशे, संपत्ति विवाद और टूटते पारिवारिक मूल्यों की भयावह तस्वीर भी पेश करता है। इस घटना ने समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब बेटा मां-बाप का नहीं हुआ और दोस्त दोस्त का नहीं रहा, तो आखिर भरोसा किस पर किया जाए।
