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रिलायंस व एनसीएल का कोयला-युक्त काला पानी जीवनदायिनी नदी के लिए अभिशाप

VIKAS KUMAR DUBEY October 24, 2025
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रिलायंस व एनसीएल का कोयला-युक्त काला पानी जीवनदायिनी नदी के लिए अभिशाप

काचन नदी में बढ़ता प्रदूषण बन रहा 30 गांवों के स्वास्थ्य के लिए खतरा, छठ पूजा पर संकट के बादल

सिंगरौली। मध्य प्रदेश का ऊर्जा नगरी कहलाने वाला सिंगरौली जिला एक बार फिर औद्योगिक प्रदूषण की चपेट में है। जिले की जीवनरेखा कही जाने वाली काचन नदी इन दिनों कोयले के काले पानी से प्रदूषित हो रही है। आरोप है कि नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की गोरबी ब्लॉक बी खदान और रिलायंस अमलोरी परियोजना से निकलने वाला कोयला-मिश्रित पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। इस लापरवाही का खामियाजा अब लगभग 30 गांवों के हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

 

कोयले का काला पानी बना ‘काला संकट’..?

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि खदानों से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना किसी ट्रीटमेंट के काचन नदी में गिर रहा है। नदी का पानी काला पड़ गया है, जिससे उसमें भारी मात्रा में कोयला और रासायनिक तत्व मिले हुए हैं। ये तत्व न केवल नदी की जल गुणवत्ता को नष्ट कर रहे हैं बल्कि मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन के लिए भी खतरा बन चुके हैं। कई गांवों के लोग इसी नदी के पानी का उपयोग पीने, स्नान और खेती के लिए करते हैं। अब जब छठ पूजा जैसे आस्था के पर्व का समय निकट है, तो श्रद्धालु इसी दूषित पानी में स्नान करने को मजबूर हैं। इस पूरे मामले को तब गंभीरता से लिया जाने लगा जब एक स्थानीय युवक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इस प्रदूषण की सच्चाई सामने रखी। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि स्टॉप डैम से लगभग 200–300 मीटर की दूरी पर कोयले का काला पानी नदी में सीधे बहाया जा रहा है। युवक ने वीडियो में जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक और कलेक्टर से अपील की है कि छठ पर्व से पहले इस प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

 

छठ पर्व से पहले स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा…

 

काचन नदी इस क्षेत्र के लिए न केवल जीवनरेखा है बल्कि धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई है। छठ पूजा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते हैं और सूर्य देव की उपासना करते हैं। लेकिन अब नदी के दूषित होने से लोगों में संक्रमण और त्वचा रोगों के खतरे बढ़ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “नदी में पानी का रंग पूरी तरह काला हो गया है। बदबू इतनी ज्यादा है कि किनारे खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को खुजली और जलन की समस्या हो रही है।”

 

प्रशासन की अनदेखी, कार्रवाई सिर्फ कागजों में..

 

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नगर पालिका निगम सिंगरौली के पार्षद रामगोपाल पाल ने बताया “कलेक्टर को एक हफ्ते पहले ज्ञापन देकर मामले की जानकारी दी गई थी। नगर निगम सिंगरौली में भी आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। काला पानी लगातार नदी में मिल रहा है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह क्षेत्रीय जलस्रोतों के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन जाएगा।”

 

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला खदानों से निकलने वाला पानी आमतौर पर भारी धातुओं जैसे लोहा, सीसा, पारा और आर्सेनिक से युक्त होता है। जब यह पानी नदी में मिल जाता है, तो यह मिट्टी और भूजल को भी प्रदूषित कर देता है। आने वाले समय में यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी आपदा साबित हो सकता है।

 

छठ पूजा पर संकट, श्रद्धालुओं की चिंता

 

छठ महापर्व पर हजारों महिलाएं और श्रद्धालु नदी किनारे पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन इस बार दूषित जल के कारण उनकी श्रद्धा और स्वास्थ्य दोनों पर संकट गहराया हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो इस बार छठ पूजा दूषित पानी में ही करनी पड़ेगी। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि प्रशासन तत्काल एनसीएल और रिलायंस खदानों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के निकास पर रोक लगाए और ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से ही पानी छोड़े। साथ ही, पर्यावरण विभाग को मौके पर जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। सिंगरौली की काचन नदी, जो कभी जीवनदायिनी थी, अब धीरे-धीरे औद्योगिक कचरे का घर बनती जा रही है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो न केवल नदी बल्कि पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी और लोगों का स्वास्थ्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा।

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VIKAS KUMAR DUBEY

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