Tehsil Day turned into a sham, with the pleas of 223 complainants in Meja in vain – not a single complaint resolved.
डेलौहां में सरकारी जमीन पर कब्जे का खुला खेल, समाधान दिवस पर सिर्फ सुनवाई, कार्रवाई शून्य
संवाददाता आलोपी शंकर शर्मा
Tehsil Meja Prayagraj मेजा प्रयागराज:- मेजा तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस जनता के लिए समाधान नहीं बल्कि सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया। इस दौरान कुल 223 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक भी प्रकरण का मौके पर निस्तारण नहीं हो सका। फरियादी घंटों लाइन में खड़े रहे, अपनी पीड़ा सुनाते रहे, मगर उन्हें सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप सिंह और प्रभारी तहसीलदार जमुना प्रसाद वर्मा ने फरियादियों की समस्याएं सुनीं और कर्मचारियों को जांच के निर्देश दिए, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह रही कि किसी भी शिकायत पर तत्काल राहत नहीं मिल सकी। इससे तहसील दिवस की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे गंभीर मामला डेलौहां गांव से सामने आया, जहां राजेश विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि गांव के जनार्दन तिवारी, अशोक कुमार, लाल जी और अनिल कुमार उर्फ गुड्डू ने सरकारी भूमि पर खुलेआम कब्जा कर रखा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपितों ने खलिहान, स्कूल की जमीन, नवीन परती भूमि और यहां तक कि सार्वजनिक रास्ते पर भी अवैध कब्जा कर लिया है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है और सरकारी संपत्ति पर निजी अधिकार जमाया जा रहा है।

मामले को गंभीर बताते हुए एसडीएम ने राजस्व निरीक्षक को टीम बनाकर जांच करने और कब्जा हटवाने के निर्देश जरूर दिए, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। यही कारण है कि फरियादियों में आक्रोश साफ झलकता रहा।
इसी तरह ममोली ग्राम पंचायत से पहुंचे अरुण कुमार पांडे ने आरोप लगाया कि गलत नाप के चलते उनकी निजी भूमि पर पंचायत भवन खड़ा कर दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि यह सीधा अन्याय है और उक्त भवन को ध्वस्त कर किसी अन्य स्थान पर निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें उनकी जमीन वापस मिल सके।
इस दौरान नायब तहसीलदार मेजा नंद लाल, बीडीओ आनंद पांडेय सहित अन्य राजस्व अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सभी मामलों में स्थलीय जांच कर समयबद्ध निस्तारण का भरोसा दिया, लेकिन बार-बार सिर्फ “जांच होगी” और “देखा जाएगा” जैसे शब्दों से जनता का भरोसा कमजोर होता जा रहा है।
संपूर्ण समाधान दिवस में उमड़ी भीड़ के बावजूद एक भी शिकायत का मौके पर निस्तारण न होना अब चर्चा का विषय बन गया है। लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि तहसील दिवस न्याय का मंच नहीं बल्कि दिखावे का कार्यक्रम बनकर रह गया है।
जनता का सवाल है—
जब समाधान दिवस पर भी समस्या का समाधान नहीं होगा,
तो फिर फरियादी आखिर जाएं कहां?
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर वास्तव में कब बुलडोजर चलेगा और गलत नाप के मामलों में पीड़ितों को कब न्याय मिलेगा। नहीं तो तहसील दिवस जनता की नजर में सिर्फ “नुमाइश का मैदान” बनकर रह जाएगा।
