The tribals’ protest against deforestation reached Delhi, and Rahul Gandhi said, “I will fight from Parliament to the streets.”
सिंगरौली के पीड़ित आदिवासियों ने दिल्ली में राहुल–प्रियंका से की मुलाकात, ग्रामसभा की अनदेखी और विस्थापन के खतरे पर उठे बड़े सवाल
संवाददाता
Singrauli Crime News सिंगरौली/दिल्ली। धिरौली कोल ब्लॉक द्वारा बंसी–बिरधा क्षेत्र में की जा रही व्यापक जंगल कटाई के खिलाफ सिंगरौली जिले के वाशी बेरदहा गांव के आदिवासियों का संघर्ष अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है। जंगल, जमीन और आजीविका बचाने के लिए वर्षों से लड़ रहे आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की और अपनी पीड़ा सीधे उनके सामने रखी।
यह प्रतिनिधिमंडल किसान कांग्रेस नेता अशोक पैगाम और पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज शाह के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा। आदिवासियों की आवाज़ को राजधानी तक पहुंचाने में मनोज शाह की भूमिका को अहम माना जा रहा है, जिनके लगातार प्रयासों से सिंगरौली का यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
एक-एक पीड़ित से राहुल गांधी ने की सीधी बातचीत
मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने सभी आदिवासियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उन्होंने जंगल कटाई से हुए नुकसान, विस्थापन के खतरे, रोजगार पर पड़े असर और आदिवासी जीवनशैली पर आई विपत्ति को गंभीरता से सुना।

पीड़ितों ने बताया कि ग्रामसभा की अनुमति और उनकी सहमति के बिना जंगलों की कटाई कर दी गई, जिससे उनका पूरा जीवन संकट में पड़ गया है।
आदिवासियों ने कहा कि जंगल उनके लिए केवल लकड़ी या जमीन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, पहचान और अस्तित्व का आधार है। कोल ब्लॉक के नाम पर उनका यह आधार छीना जा रहा है।
“आपकी लड़ाई संसद में गूंजेगी” — राहुल गांधी
आदिवासियों की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि यह सिर्फ सिंगरौली का मुद्दा नहीं है, बल्कि देशभर के आदिवासी अधिकारों से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा—
“आपकी लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक लड़ी जाएगी। आपकी आवाज़ पूरी ताकत से संसद में उठाई जाएगी।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते इस गंभीर मसले पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे स्वयं सिंगरौली आकर आदिवासियों के साथ सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगे।
प्रियंका गांधी ने भी जताई संवेदना
प्रियंका गांधी ने भी पीड़ित आदिवासियों से संवाद किया और उनके संघर्ष के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और जंगल-जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।
मनोज शाह और अशोक पैगाम की भूमिका रही निर्णायक
इस पूरे घटनाक्रम में मनोज शाह और किसान कांग्रेस नेता अशोक पैगाम की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने सिंगरौली में चल रहे आंदोलन को संगठित किया और आदिवासियों की आवाज़ को दिल्ली तक पहुंचाया।
स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अनदेखी के बाद अब इस मुद्दे के राष्ट्रीय स्तर पर उठने से सरकार पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल
धिरौली कोल ब्लॉक के नाम पर हो रही जंगल कटाई को लेकर पहले से ही कई सवाल खड़े हो चुके हैं।
✔ ग्रामसभा की अनुमति का पालन हुआ या नहीं?
✔ पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तें पूरी की गईं या नहीं?
✔ आदिवासी अधिकार कानूनों का उल्लंघन तो नहीं हुआ?
इन तमाम बिंदुओं पर प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है। राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
आदिवासी संघर्ष को मिली नई ताकत
दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद वाशी बेरदहा सहित आसपास के गांवों के आदिवासियों में नई उम्मीद जगी है। उन्हें विश्वास है कि अब उनकी लड़ाई केवल स्थानीय नहीं रही, बल्कि देश की संसद तक पहुंच चुकी है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस आवाज़ को सुनेगी, या आदिवासियों को अपने जंगल बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा?
