Magh has passed, Kalpavas is over… yet the call of Sangam has not stopped, devotees are flocking to Prayagraj in the desire to take a bath.
माघी पूर्णिमा के बाद भी संगम पर लाखों की भीड़, त्रिजटा स्नान पर्व पर फिर टूट सकता है रिकॉर्ड; महाशिवरात्रि तक जारी रहने की उम्मीद
ब्यूरो रिपोर्ट
Magh Mela prayagraj प्रयागराज। -माघी पूर्णिमा के साथ ही माघ महीना और कल्पवास का विधिवत समापन हो चुका है, लेकिन संगम में डुबकी लगाने की आस्था अभी थमी नहीं है। माघ मेला क्षेत्र में अब भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। मेला प्रशासन के अनुसार, माघी पूर्णिमा के अगले ही दिन करीब 24.5 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया, जो यह दर्शाता है कि आस्था की धारा अब भी पूरे वेग से बह रही है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अनुमान जताया है कि त्रिजटा स्नान पर्व (मंगलवार और बुधवार) को भी भारी संख्या में श्रद्धालु संगम पहुंचेंगे। इस अवसर पर संतों और बचे हुए कल्पवासियों की भी विशेष मौजूदगी रहेगी।
महाशिवरात्रि तक बनी रहेगी भीड़
मेला प्रशासन का कहना है कि 15 फरवरी को पड़ने वाले महाशिवरात्रि स्नान पर्व तक संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रह सकती है। वसंत पंचमी, अचला सप्तमी और माघी पूर्णिमा जैसे प्रमुख स्नान पर्वों पर पहले ही पिछले सभी रिकॉर्ड टूट चुके हैं।
अब तक करीब 22 करोड़ श्रद्धालु संगम और गंगा में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।
खास बातें:-
माघी पूर्णिमा तक 22 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हैं संगम में डुबकी ,पूर्णिमा के अगले दिन भी 24.5 लाख श्रद्धालुओं का स्नान ,त्रिजटा स्नान पर्व पर दो दिनों में 45 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
हर मार्ग पर कतारें, हर घाट पर आस्था-
काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग, संगम अपर मार्ग और संगम लोअर मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। मंगलवार शाम से त्रिजटा स्नान पर्व का मुहूर्त शुरू हो जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।
त्रिजटा स्नान पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था-
त्रिजटा स्नान पर्व को देखते हुए संगम समेत गंगा के सभी प्रमुख घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेटों की तैनाती की जा रही है।
उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला ने बताया कि स्नान घाटों के साथ-साथ पांटून पुलों और प्रमुख मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
कल्पवासी कल होंगे रवाना-
कल्पवास का विधान पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक माना जाता है। इसलिए अधिकतर संत और कल्पवासी माघी पूर्णिमा पर स्नान कर लौट चुके हैं।
जो संत और कल्पवासी अब भी मेला क्षेत्र में रुके हैं, वे त्रिजटा स्नान के बाद बुधवार को अपने गंतव्य को रवाना होंगे।
माघी पूर्णिमा के तीसरे दिन फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को त्रिजटा स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
कुछ सेक्टर वीरान, संगम और परेड अब भी गुलजार
इस बार माघ मेला सात सेक्टरों में बसाया गया था।
सेक्टर 5, 6 और 7 अब लगभग वीरान हो चुके हैं
सेक्टर 1, 2, 3 (परेड क्षेत्र) अब भी गुलजार हैं
सेक्टर 4 में कुछ संतों के शिविर अब भी मौजूद हैं
क्या कहते हैं मेलाधिकारी -मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया –
“माघी पूर्णिमा के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। लगभग 24.5 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। त्रिजटा स्नान पर्व पर भी भारी भीड़ की उम्मीद है, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।”
माघ का महीना बीत चुका है, कल्पवास की परंपरा पूरी हो चुकी है, लेकिन संगम स्नान की लालसा अब भी श्रद्धालुओं को प्रयागराज खींच ला रही है।
आस्था का यह जनसैलाब प्रशासन के लिए चुनौती भी है और सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल भी।
अब सबकी नजरें त्रिजटा स्नान पर्व और उसके बाद महाशिवरात्रि पर टिकी हैं, जहां फिर एक बार संगम पर श्रद्धा का महासंगम देखने को मिलेगा।
