Teachers found roaming around during school hours will face action, BSA warns of strict action
बिना अवकाश या अनुमति विद्यालय छोड़ने पर होगी विभागीय कार्रवाई, कार्यप्रणाली सुधारने का निर्देश
संवाददाता आलोपी शंकर शर्मा
Action, BSA Prayagragnews :- प्रयागराज में स्कूलों में पठन–पाठन की व्यवस्था सुधारने के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अनिल कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विद्यालय अवधि में बिना अवकाश या पूर्व अनुमति के स्कूल छोड़कर बीएसए कार्यालय या अन्य स्थानों पर घूमने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बीएसए ने कहा कि कुछ शिक्षक निजी अथवा संगठनात्मक कार्यों के बहाने स्कूल समय में इधर-उधर भ्रमण करते पाए जा रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
बीएसए अनिल कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों से बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। शिक्षक का मुख्य दायित्व कक्षा में उपस्थित रहकर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह कृत्य निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 तथा उत्तर प्रदेश निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली-2011 में निर्धारित शिक्षकों के कर्तव्यों के विरुद्ध है। साथ ही यह टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए तय समयावधि और कार्य निर्धारण से संबंधित शासनादेश का भी उल्लंघन है।
बीएसए ने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी शिक्षकों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाना होगा। विद्यालय अवधि में बिना पूर्व अनुमति या अवकाश स्वीकृति के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, समग्र शिक्षा कार्यालय या किसी अन्य स्थान पर भ्रमण करते पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसमें वेतन कटौती से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई तक की जा सकती है।
उन्होंने अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति और कक्षा संचालन पर विशेष नजर रखी जाए। किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर तत्काल रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाए।
बीएसए की इस चेतावनी के बाद शिक्षकों में हलचल मची हुई है। विभागीय स्तर पर इसे शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की सख्त पहल माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस निर्देश के बाद स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाई की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
