Claims of development crumble in the mud! Innocent children are forced to carry their shoes and slippers to school, raising questions about the silence of those responsible.
ग्राम सभा पवरी में बरसात ने खोली सरकारी व्यवस्थाओं की पोल, दलदल बनी सड़क से रोजाना गुजर रहे छात्र-छात्राएं; शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
संवाददाता: बालेंद्र कुमार
प्रयागराज | सादिका पवित्र |:- सरकार गांवों में विकास, बेहतर सड़क और हर घर तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन प्रयागराज के यमुनानगर अंतर्गत कौंधियारा विकासखंड की ग्राम सभा पवरी की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। यहां बरसात की पहली फुहार ने ही सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। गांव की मुख्य कच्ची सड़क जलभराव और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, जिससे मासूम स्कूली बच्चों को रोजाना अपमानजनक और जोखिम भरी परिस्थितियों में स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
शनिवार सुबह करीब सात बजे का दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था। छात्र-छात्राएं एक हाथ में स्कूल बैग और दूसरे हाथ में अपने जूते-चप्पल लेकर नंगे पैर कीचड़ और पानी से भरे रास्ते को पार करते दिखाई दिए। जिस उम्र में बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, उस उम्र में वे बदहाल व्यवस्था की सजा भुगतने को विवश हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से सड़क की हालत बदतर बनी हुई है। हल्की बारिश होते ही पूरी सड़क तालाब का रूप ले लेती है और आवागमन लगभग ठप हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को उठानी पड़ती है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। धरातल पर न तो सड़क बनी और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप हर बरसात में गांव के लोग उसी बदहाल स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को रोज ऐसे रास्ते से स्कूल भेजना किसी जोखिम से कम नहीं है। कई बार मजबूरी में बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाता, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। यदि समय रहते सड़क और नालियों का निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अब ग्रामीणों का सब्र जवाब देने लगा है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर केवल घोषणाएं और दावे किए जाते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यदि जल्द ही सड़क निर्माण और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीण जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
जनता पूछ रही है !सवाल …
जब बच्चे रोज कीचड़ में जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं?
क्या विकास केवल सरकारी फाइलों और भाषणों तक सीमित रह गया है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?
आखिर मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
