Major action in the case of death of a baby in the womb: FIR registered against female doctor on the instructions of DM.
मेडिकल जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं; इलाज में कथित लापरवाही से गर्भस्थ शिशु की मौत का आरोप, पीड़िता की जान भी खतरे में पड़ी, धमकी देने का भी आरोप
संवाददाता: बालेंद्र कुमार
प्रयागराज | सादिका पवित्र |:– प्रयागराज के यमुनानगर स्थित करछना तहसील क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत गर्भवती महिला के इलाज में कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। गर्भ में पल रहे शिशु की मौत और प्रसूता की जान खतरे में पड़ने के आरोपों के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर बुधवार देर रात संबंधित महिला चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। मेडिकल जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुई इस कार्रवाई से निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित गणेश शंकर शुक्ल ने जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक मेडिकल जांच समिति गठित की गई, जिसने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने महिला चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
पीड़ित गणेश शंकर शुक्ल के अनुसार उनकी पत्नी वशिता गर्भवती थीं और एक निजी अस्पताल में नियमित उपचार करा रही थीं। आरोप है कि 28 अक्टूबर 2025 की रात प्रसव पीड़ा शुरू होने पर अगले दिन अस्पताल पहुंचने पर महिला चिकित्सक ने डिलीवरी में अभी लगभग 20 दिन का समय बताते हुए केवल इंजेक्शन और दवाएं देकर उन्हें वापस घर भेज दिया। परिवार का कहना है कि रात में दोबारा संपर्क करने पर भी चिकित्सक ने स्थिति को सामान्य बताते हुए किसी प्रकार की गंभीर जांच या भर्ती की आवश्यकता नहीं बताई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि 5 नवंबर 2025 को वशिता की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और गर्भस्थ शिशु की हलचल पूरी तरह बंद हो गई। दोबारा अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक ने बताया कि बच्चे की मूवमेंट नहीं हो रही है तथा गले में नाल फंसने के कारण उसकी गर्भ में ही मौत हो चुकी है।

परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इलाज में लापरवाही को लेकर सवाल उठाए, तो महिला चिकित्सक ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय उनसे अभद्र व्यवहार किया और कथित रूप से हाथ-पैर तुड़वाने तथा उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
स्थिति गंभीर होने पर दंपति करछना के एक अन्य अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि गर्भ में मृत शिशु के शरीर में सड़न फैल चुकी है, जिससे प्रसूता की जान को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। इसके बाद 7 नवंबर 2025 को वशिता को अस्पताल में भर्ती कर चिकित्सकीय प्रक्रिया के माध्यम से मृत शिशु को बाहर निकाला गया।
घटना के बाद गणेश शंकर शुक्ल ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। प्रशासन द्वारा गठित मेडिकल जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने संबंधित महिला चिकित्सक के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली।
औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी कमलेश पटेल ने पुष्टि करते हुए बताया कि मेडिकल टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी महिला चिकित्सक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की विवेचना कर रही है तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक आरोप और दर्ज एफआईआर से संबंधित है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
