Where are the bonfires and night shelters? The people of Prayagraj are suffering in the fog and bitter cold. Who is responsible?
घना कोहरा, गलन भरी ठंड से ठिठुरा शहर, 50 मीटर से कम विजिबिलिटी; मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद प्रशासन की तैयारी फेल
ब्यूरो रिपोर्ट
PRAYAGRAJ WEATHER – प्रयागराज में ठंड ने अचानक ऐसा शिकंजा कसा कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन तक नहीं हो सके। घने कोहरे और सिहरन भरी पछुआ हवाओं ने जनजीवन को जकड़ लिया, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर प्रशासनिक लापरवाही की रही। मौसम विभाग की पहले से चेतावनी के बावजूद शहर के कई इलाकों में अलाव, रैन बसेरे और ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी नजर आए।
उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही तेज ठंडी हवाओं ने नमी बढ़ाई, जिससे शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपट गया। सड़कों, पुलों और खुले इलाकों में दृश्यता कई जगहों पर 50 मीटर से भी कम रही। वाहन रेंगते नजर आए, हेडलाइट और फॉग लाइट के सहारे सफर करना मजबूरी बन गया। इसके बावजूद ट्रैफिक और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।
ठंड सड़कों पर, अलाव फाइलों में: प्रयागराज में गलन बढ़ी, प्रशासन की संवेदनाएं जमीं कोहरे और कड़ाके की ठंड में कांपता शहर, चौराहों–बस स्टैंड पर अलाव नदारद; गरीबों के हिस्से सिर्फ सरकारी दावे
प्रयागराज में ठंड ने जबरदस्त दस्तक दी है। घना कोहरा, तेज पछुआ हवाएं और गलन भरी सर्दी ने पूरे शहर को जकड़ लिया, पर प्रशासन के इंतजाम कागजों से आगे नहीं बढ़ पाए।
सबसे चिंताजनक तस्वीर शहर के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और गरीब बस्तियों में देखने को मिली, जहां ठंड से बचाव के लिए लगाए जाने वाले अलाव या तो बेहद कम थे या पूरी तरह नदारद नजर आए। खुले आसमान के नीचे रहने वाले मजदूर, रिक्शा चालक और ठेला दुकानदार ठंड से बचने के लिए खुद ही आग जलाने को मजबूर दिखे। सवाल यह है कि जब मौसम विभाग पहले ही कड़ाके की ठंड की चेतावनी दे चुका था, तो अलाव की व्यवस्था सिर्फ आदेशों और बैठकों तक ही क्यों सिमट कर रह गई?
अलाव के नाम पर खानापूर्ति
नगर निगम और प्रशासन द्वारा हर साल ठंड से पहले अलाव की व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई। कई स्थानों पर जहां अलाव जलना चाहिए था, वहां सिर्फ राख और अधजली लकड़ियां पड़ी मिलीं। कुछ जगहों पर अलाव दिन में दिखा और रात होते-होते गायब हो गया, मानो ठंड भी टाइम टेबल देखकर आती हो।
गरीबों की ठंड, सिस्टम की बेरुखी
ठंड सबसे ज्यादा उसी को सताती है, जिसके पास छत और गर्म कपड़े नहीं होते। बावजूद इसके रैन बसेरों की हालत भी बेहतर नहीं दिखी। कई रैन बसेरे या तो खाली रहे या वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा। कंबल वितरण की घोषणाएं जरूर सुनाई दीं, लेकिन जरूरतमंदों तक राहत पहुंचती कम और फोटो सेशन ज्यादा नजर आया।
स्कूल, दफ्तर और बाजार प्रभावित
ठंड और कोहरे का सीधा असर स्कूलों और दफ्तरों पर पड़ा। बच्चों को भारी ठंड में स्कूल जाना पड़ा, जबकि कई दफ्तरों में कामकाज देर से शुरू हुआ। बाजारों में सुबह सन्नाटा पसरा रहा, दोपहर बाद ही हलचल दिखी। रेलवे और बस सेवाएं भी कोहरे के कारण प्रभावित रहीं, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी।
तापमान गिरा, चेतावनी फिर भी अनसुनी
मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम है। न्यूनतम तापमान में भी गिरावट के आसार हैं। विभाग ने अगले एक सप्ताह तक घने कोहरे और कड़ाके की ठंड की चेतावनी जारी की है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां नाकाफी दिखाई दे रही हैं।
धार्मिक स्थलों पर भी पसरा सन्नाटा
ठंड और कोहरे का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखा। संगम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। लोगों ने ठंड के कारण स्नान और पूजा टाल दी।
प्रशासन से बढ़ी उम्मीदें, सवाल भी
भीषण ठंड को देखते हुए शहरवासियों की मांग है कि सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त अलाव, रैन बसेरों की व्यवस्था और जरूरतमंदों को कंबल वितरण तत्काल सुनिश्चित किया जाए। मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एचएन मिश्रा के अनुसार आने वाले दिनों में गलन और बढ़ सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन चेतावनियों के बाद भी हरकत में आएगा या ठंड की तरह सिस्टम की सुस्ती भी लोगों को यूं ही ठिठुराती रहेगी?
