Village duty mandatory for teachers in Prayagraj: भाकियू की शिकायत के बाद बीएसए सख्त—मोबाइल में व्यस्त रहने वाले शिक्षकों पर लगाम, अभिभावकों से सीधा संवाद बढ़ाने का आदेश
शिक्षण गुणवत्ता सुधारने के लिए गांव भ्रमण अनिवार्य, कमजोर उपस्थिति वाले बच्चों पर रहेगा खास फोकस
ब्यूरो रिपोर्ट
Village duty mandatory for teachers in Prayagraj
(उ.प्र.) प्रयागराज। – प्राथमिक शिक्षा को लेकर बढ़ती शिकायतों और गिरते मानकों के बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। जिले के सभी बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए अब महीने में दो दिन गांवों का अनिवार्य भ्रमण तय किया गया है। इस दौरान शिक्षक घर–घर जाकर अभिभावकों से मिलेंगे, बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और समस्याओं पर खुलकर बातचीत करेंगे ताकि स्कूल और परिवार के बीच संवाद मजबूत हो सके।
मोबाइल में उलझे रहने की शिकायत पर विभाग सक्रिय
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने यह निर्देश उस शिकायत के बाद जारी किया है, जिसमें कहा गया था कि कई शिक्षक स्कूल समय में मोबाइल पर ही व्यस्त रहते हैं और शिक्षण कार्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे। अभिभावकों ने भी बताया कि शिक्षक उनसे संवाद नहीं करते, जिसके कारण बच्चों की शैक्षिक प्रगति प्रभावित हो रही है।
बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस नई व्यवस्था का हर स्कूल में पालन सुनिश्चित किया जाए और इसकी समीक्षा नियमित रूप से की जाए।
भाकियू के ज्ञापन से बढ़ी कार्रवाई की गति-
हाल ही में भारतीय किसान यूनियन (अ.) ने बीएसए को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की थी कि “प्राइमरी स्तर पर कई शिक्षक स्कूल आकर समय बिताते हैं, लगातार मोबाइल देखते रहते हैं और पढ़ाई का स्तर नीचे जा रहा है।”
किसान यूनियन ने प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए सख्त और ठोस कदम उठाने की मांग की थी। इसी के बाद विभाग ने यह निर्देश जारी किया, जिसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षकों की ‘गांव कनेक्ट’ जिम्मेदारी—केंद्र में विद्यार्थी ( Village duty mandatory for teachers in Prayagraj)
निर्देश के अनुसार शिक्षक गांव भ्रमण के दौरान—
अभिभावकों को बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे
पूछेंगे कि बच्चों को पढ़ने में कौन सी दिक्कतें आ रही हैं
बताएंगे कि स्कूल में बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है
बच्चों की कम उपस्थिति, कमजोर प्रदर्शन और नियमितता की जानकारी साझा करेंगे
अभिभावकों की समस्याएं सुनकर उन्हें स्कूल से जोड़ने की कोशिश करेंगे
बीएसए का मानना है कि शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बढ़ा संवाद बच्चों की पढ़ाई में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
इसे भी पढ़ें:- दहेज लोभियों को अदालत से कड़ी सजा: विवाहिता को जलाकर मारने वाले तीन दोषियों को उम्रकैद
शिक्षण गुणवत्ता सुधारने की बड़ी पहल-
विभाग का कहना है कि जब शिक्षक खुद गांव में जाकर अभिभावकों से मिलेंगे, तो विद्यार्थियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और शिक्षण में ढील बरतने की गुंजाइश कम होगी। यह पहल उपस्थिति सुधारने, ड्रॉपआउट घटाने और प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा देने में मददगार साबित हो सकती है।
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अभियान के क्रियान्वयन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और लापरवाही पर कार्रवाई तय है।
