सिंगरौली में ‘जंगलराज’: मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक की जमीन निगल गए ‘सफेदपोश’ गिद्ध, क्या बिक चुका है प्रशासन?
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और प्रशासनिक इकबाल को खुली चुनौती दी है। यहाँ मानवता का गला घोंटकर, एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक को मोहरा बनाकर उसकी बेशकीमती पैतृक जमीन को भू-माफियाओं ने डकार लिया है। यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक असहाय परिवार के विरुद्ध ‘प्रशासनिक नरसंहार’ है।
सत्ता के दलालों का नंगा नाच: अपहरण, आतंक और अवैध रजिस्ट्री
आरोप हैं कि ध्रुव , और रोशन लाल गुप्ता के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने कानून को अपनी जेब में रख लिया है। पीड़ित अनिल कुमार, जिसे दुनिया की समझ तक नहीं है, उसे घर से उठाकर ले जाना और डरा-धमकाकर उसकी संपत्ति अपने नाम लिखवा लेना किसी फिल्मी डकैती से कम नहीं है।
क्या सिंगरौली में अब अपराधी तय करेंगे कि किसकी जमीन सुरक्षित रहेगी और किसकी नहीं?
रजिस्ट्री कार्यालय या भ्रष्टाचार की मंडी? रजिस्ट्रार अशोक सिंह के पाप का घड़ा भरा!
इस पूरे पाप के खेल का सबसे बड़ा मोहरा रजिस्ट्रार अशोक सिंह है। एक ऐसा अधिकारी, जिस पर पहले से ही लोकायुक्त की जांच का साया है, वह आखिर किसके इशारे पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है?
अंधा कानून या अंधा रजिस्ट्रार? एक विक्षिप्त व्यक्ति रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचता है और रजिस्ट्रार को उसकी मानसिक स्थिति नहीं दिखती? यह अंधापन नहीं, बल्कि ‘रिश्वत के नोटों’ की पट्टी है।
अवैध वसूली का उद्योग: स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, रजिस्ट्री कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है जहाँ हर हस्ताक्षर की कीमत तय है। क्या मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति केवल कागजों तक सीमित है?
आदिवासी अस्मिता पर प्रहार: डॉ. मोहन यादव सरकार को खुली चुनौती
एक तरफ सरकार ‘जनजातीय गौरव’ के नारे लगाती है, वहीं दूसरी ओर सिंगरौली में एक SC/ST परिवार को सरेआम लूटा जा रहा है। आरोपियों ने न केवल जमीन हड़पी, बल्कि एक वंचित परिवार के जीवित रहने का अधिकार भी छीन लिया है। यह सीधे तौर पर सरकार की साख पर बट्टा है।
“शर्म आनी चाहिए उस तंत्र को, जहाँ एक मां अपने विक्षिप्त बेटे के लिए न्याय की भीख मांग रही है और साहब कुर्सी पर बैठकर फाइलें दबा रहे हैं। यह चुप्पी अपराधियों के साथ मिलीभगत का सबसे बड़ा प्रमाण है!”
अब आर-पार की जंग: हमारी मांगें, जो पत्थर की लकीर हैं!
कलेक्टर सिंगरौली की जवाबदेही: बिना किसी विलंब के इस फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त (Cancel) किया जाए। कागजों पर नहीं, जमीन पर न्याय दिखना चाहिए।
सलाखों के पीछे हों अपराधी: ध्रुव सिंह, दिग्विजय सिंह और रोशनलाल गुप्ता को तत्काल SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल की कालकोठरी में सड़ाया जाए।
भ्रष्ट रजिस्ट्रार का अंत: अशोक सिंह जैसे ‘दीमक’ अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त कर जेल भेजा जाए। इनकी संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच हो।
विपक्ष और सरकार जागें: जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सिंगरौली के इस ‘भू-माफिया तांडव’ पर खामोश क्यों हैं? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तुरंत ‘बुलडोजर’ न्याय का परिचय दें, अन्यथा जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
