सिंगरौली (मध्य प्रदेश): ऊर्जाधानी सिंगरौली में विकास और विनाश का एक अजीबोगरीब द्वंद्व छिड़ा हुआ है। एक ओर जहाँ क्षेत्रीय विधायक क्षेत्र की तस्वीर बदलने और विकास की नई इबारत लिखने में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला संगठन में मचे ‘वसूली तांडव’ ने पूरी साख को दांव पर लगा दिया है। कार्यकर्ताओं का खुला आरोप है कि संगठन अब सिद्धांतों से नहीं, बल्कि ‘अदृश्य नेत्री’ के रिमोट कंट्रोल से चल रहा है।
कुर्सी पर ‘कठपुतली’, शासन ‘अदृश्य शक्ति’ का
जिले के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिला अध्यक्ष की कुर्सी महज एक ‘शोपीस’ बनकर रह गई है। असली सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति एक ‘अदृश्य नेत्री’ के हाथों में कैद है। कार्यकर्ताओं का आक्रोश चरम पर है, जिनका कहना है कि:
- अध्यक्ष की बेबसी: जिले के मुखिया इतने लाचार और बौने नजर आ रहे हैं कि वे अपनी आंखों के सामने हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे।
- संगठन का अपमान: दशकों से खून-पसीना बहाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर, एक ‘बाहरी हस्तक्षेप’ को पूरे जिले का भाग्य विधाता बना दिया गया है।
‘सुंदर के कमंडल’ का आतंक: जिले भर में खुली लूट!
वसूली के इस खेल में सबसे घिनौना चेहरा ‘सुंदर के कमंडल’ का सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि पूरे जिले को वसूली का चारागाह बना दिया गया है।
- खुलेआम उगाही: जिले के हर कोने में ‘कमंडल’ के नाम पर वसूली का जाल बिछा है, जिसे कथित तौर पर ‘ऊपर’ का संरक्षण प्राप्त है।
- अध्यक्ष की किरकिरी: जिस पद की गरिमा जिले की समस्याओं को सुलझाने में होनी चाहिए थी, वह आज केवल ‘वसूली सिंडिकेट’ की चुप्पी और हिस्सेदारी के कारण मजाक बनकर रह गई है। इसी कारण पूरे जिले में जिला अध्यक्ष की थू-थू हो रही है।
विधायक की मेहनत पर फिर रहा पानी
विडंबना देखिए, एक तरफ विधायक क्षेत्र में नई सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का जाल बिछाकर जनता का दिल जीत रहे हैं, तो दूसरी तरफ संगठन के भीतर बैठे ये ‘वसूली बाज’ और ‘अदृश्य शक्तियां’ सरकार की छवि को मिट्टी में मिला रही हैं। कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि विकास की चमक, भ्रष्टाचार के इस कीचड़ में दबती जा रही है।
“क्या जिला अध्यक्ष का काम केवल ‘अदृश्य नेत्री’ के आदेशों को तामील करना और ‘कमंडल’ की वसूली पर पर्दा डालना रह गया है? सिंगरौली का कार्यकर्ता अब इस नपुंसक कार्यप्रणाली को और अधिक सहन नहीं करेगा।” — आक्रोशित कार्यकर्ता
बड़ा सवाल: कब तक चलेगा ‘नेत्री-राज’?
सिंगरौली की जनता और ईमानदार कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह ‘वसूली का कमंडल’ जिले को लूटता रहेगा? कब तक जिला अध्यक्ष एक रबर स्टैम्प बने रहेंगे? अगर समय रहते इस ‘अदृश्य हस्तक्षेप’ को खत्म नहीं किया गया, तो आने वाले समय में संगठन को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
