लोकतंत्र का गला घोंटती देवरी सरपंच: सरकारी आदेश ‘ठेंगे’ पर, भ्रष्टाचार का नंगा नाच शुरू!
देवरी/परसौना: सत्ता का नशा और धन की हवस जब सिर चढ़कर बोलती है, तो जनप्रतिनिधि ‘जनसेवक’ नहीं बल्कि ‘भक्षक’ बन जाते हैं। देवरी ग्राम पंचायत में वर्तमान सरपंच ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार करते हुए न केवल नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई हैं, बल्कि शासन-प्रशासन के इकबाल को भी सीधी चुनौती दे डाली है। परसौना बाजार की नीलामी में जो खेल खेला गया है, वह यह बताने के लिए काफी है कि यहाँ लोकतंत्र नहीं, बल्कि ‘कमीशनखोरी का जंगलराज’ चल रहा है।
नीलामी में सरेआम डकैती: 4 लाख की बोली और 5 लाख की ‘रिश्वत’!
बीते 30 मार्च को पंचायत इंस्पेक्टर, पीसीओ और सचिव जैसे जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में नीलामी की प्रक्रिया पूरी हुई। नरेंद्र कुमार दुबे ने 4 लाख 4 हजार रुपये की उच्चतम बोली लगाकर पारदर्शी तरीके से हक जीता। उस वक्त सरपंच महोदय की कलम ने कागजों पर दस्तखत तो कर दिए, लेकिन उनकी नीयत में खोट उसी पल पैदा हो चुका था।
नीलामी खत्म होते ही सरपंच का असली चेहरा सामने आ गया। अब 5 दिन बीत जाने के बाद भी न तो राशि जमा की जा रही है और न ही अधिकार पत्र दिया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सरपंच अपने पालतू दलालों और गुर्गों के जरिए अब 5 लाख रुपये की ‘अवैध वसूली’ की मांग कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या पंचायत भवन अब वसूली का अड्डा बन चुका है? सरपंच को सरकारी खजाने से ज्यादा अपनी निजी तिजोरी भरने की चिंता क्यों है?
जनपद CEO के आदेश को जूते की नोक पर रखती सरपंच!
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सरपंच को जिला प्रशासन और जनपद सीईओ (CEO) के आदेशों का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। सीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तत्काल राशि जमा कराकर नरेंद्र दुबे को अधिकार पत्र सौंपा जाए, लेकिन सरपंच महोदय शायद खुद को ‘संविधान से ऊपर’ समझ बैठी हैं। सरकारी आदेशों को कूड़ेदान में फेंककर अपनी जिद और लालच पर अड़ना यह साबित करता है कि देवरी पंचायत में व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है।
गुंडागर्दी और दलाली का गठजोड़: आखिर कब तक?
सरपंच की यह हिम्मत इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि उनके पीछे दलालों का एक ऐसा तंत्र खड़ा है जो विकास कार्यों को अपनी जागीर समझता है। एक तरफ जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, और दूसरी तरफ सरपंच साहब सरकारी संपत्ति की नीलामी को अपनी ‘निजी कमाई’ का जरिया बना रही हैं।
सीधे सवाल – सीधे जवाब चाहिए:
- जब नीलामी की हर प्रक्रिया आपके सामने हुई, तो अब ‘सांप सूंघ गया’ है या जेब भरने का इंतजार है?
- क्या देवरी पंचायत में कानून का राज चलेगा या सरपंच की मनमानी गुंडागर्दी?
- प्रशासन की चुप्पी का क्या मतलब निकाला जाए? क्या बड़े अधिकारियों की मौन सहमति इस भ्रष्टाचार को खाद-पानी दे रही है?
अंतिम चेतावनी: अब बर्दाश्त नहीं होगी लूट!
प्रशासन कान खोलकर सुन ले, अगर तत्काल नरेंद्र दुबे को उनका कानूनी हक नहीं दिया गया और इस भ्रष्टाचार की ‘महारानी’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगी। यह खबर केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि उस सिस्टम को आईना है जो भ्रष्टाचार के आगे नतमस्तक है।
नरेंद्र दुबे को हक दो या अपनी कुर्सी छोड़ो! देवरी की जनता अब इस कमीशनखोरी का हिसाब मांग रही है।
