*सिंगरौली/देवसर:* रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं तो कानून की उम्मीद किससे की जाए? जियावन थाना क्षेत्र में इन दिनों रेत माफियाओं का राज चल रहा है, जहाँ शासन के नियम और NGT की पाबंदियां सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं।
*माफियाओं के प्रमुख अड्डे और लोकेशन का खेल*
*सूत्रों* के मुताबिक, माफियाओं ने पुलिस की हर मूवमेंट पर नजर रखने के लिए बाकायदा चेक-पोस्ट बना रखे हैं..
*कॉलेज चौराहा* यह रेत माफियाओं के लिए सबसे सुरक्षित गलियारा बन चुका है।
*सहूआर चौराहा* यहाँ एक कथित नेताजी की दुकान पर माफियाओं का जमघट लगा रहता है, जो पुलिस की गाड़ियों का लोकेशन ट्रैक करते हैं।
*यूनियन बैंक व कॉलेज चौराहा* ये स्थान अवैध परिवहन के मुख्य केंद्र हैं। काली चौराहा तो रेत माफियाओं का गढ़ बन चुका है, जहाँ दिन-रात ट्रैक्टरों की गूंज सुनाई देती है।
*टाइमिंग का खेल, सुबह 6 से 9 बजे तक खुली चुनौती*
हैरत की बात यह है कि *कॉलेज चौराहा* के आपस सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक, जब दुनिया जाग रही होती है, तब जियावन पुलिस की नाक के नीचे से अवैध रेत लदे ट्रैक्टरों का काफिला बेखौफ गुजरता है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होने के बाद भी प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
*हाईटेक मुखबिरी और खाकी की चुप्पी*
जैसे ही पुलिस की गाड़ी थाने से निकलती है, सहूआर और कॉलेज चौराहे पर बैठे लोकेशन ट्रेसर तुरंत माफियाओं को फोन कर देते हैं और गाड़ियां गलियों में छिप जाती हैं। क्या यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल नहीं है? क्या जियावन पुलिस और माफियाओं के बीच एंट्री फीस का कोई गुप्त समझौता है?
*जनता के तीखे सवाल*
क्या जियावन पुलिस SDOP कार्यालय के सामने, *यूनियन बैंक और कॉलेज चौराहा* पर गश्त लगाकर माफियाओं को खदेड़ने का साहस दिखाएगी?
पूर्व थाना प्रभारी (DSP रोशनी) के समय जो खौफ माफियाओं में था, वह अब ‘मिलीभगत’ में क्यों बदल गया है?
क्या सिंगरौली SP साहब उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे जो खाकी की आड़ में माफियाओं के लिए लोकेशन एजेंट का काम कर रहे हैं?
नदियों का सीना छलनी हो रहा है, राजस्व की चोरी हो रही है और गांव की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या रेत माफियाओं का यह नंगा नाच यूं ही जारी रहेगा..
