Tattoos cause deadly infection: Two women at SRN Hospital test positive for AIDS
शादी से पहले बनवाए गए टैटू से फैला संक्रमण, एक गर्भवती महिला के बच्चे पर भी खतरा, डॉक्टरों ने की सख्त चेतावनी
ब्यूरो रिपोर्ट
Prayagraj SRN Hospita Appdet प्रयागराज :- प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में इलाज कराने पहुंचीं दो महिलाओं में टैटू के जरिए एचआईवी (एड्स) संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से एक महिला गर्भवती है, जिससे उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। डॉक्टरों ने मामले को गंभीर बताते हुए टैटू बनवाते समय साफ-सफाई और नई सुई-स्याही के इस्तेमाल की सख्त जरूरत पर जोर दिया है।
पहला मामला टैगोर टाउन निवासी 26 वर्षीय महिला का है, जो तीन माह की गर्भावस्था के दौरान जांच के लिए एसआरएन अस्पताल के स्त्री रोग विभाग पहुंची थी। जांच में महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई गई, जबकि उसके पति की रिपोर्ट निगेटिव आई। काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि महिला का शादी से पहले किसी प्रकार का असुरक्षित यौन संबंध नहीं था, न ही उसे कभी गलत तरीके से खून चढ़ाया गया और न ही संक्रमित सुई का इस्तेमाल हुआ। जांच में उसके शरीर पर टैटू पाया गया। पूछताछ में महिला ने बताया कि उसने शादी से तीन महीने पहले टैटू बनवाया था। फिलहाल महिला को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) की दवाएं दी जा रही हैं।

दूसरा मामला बालसन क्षेत्र के पास रहने वाली 32 वर्षीय महिला का है। महिला के पैर में दो महीने पहले चोट लगी थी, जो काफी इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो रही थी। एसआरएन अस्पताल में जांच के दौरान शुगर और एचआईवी टेस्ट कराया गया, जिसमें एड्स की पुष्टि हुई। उसके पति की रिपोर्ट भी निगेटिव आई। काउंसलिंग में पता चला कि महिला ने चार महीने पहले टैटू बनवाया था।
डॉक्टरों का कहना है कि टैटू बनवाते समय यदि नई सुई और नई स्याही का इस्तेमाल न किया जाए तो एचआईवी जैसे खतरनाक संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। संक्रमित सुई या रंग के माध्यम से वायरस सीधे रक्त में प्रवेश कर सकता है।
एड्स की पहचान कैसे करें-
एचआईवी या एड्स की सही पहचान केवल रक्त परीक्षण से ही संभव है। इसके लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों जैसे हो सकते हैं, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, गले में खराश, अत्यधिक थकान, रात में पसीना आना और त्वचा पर चकत्ते शामिल हो सकते हैं। कई बार लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई भी नहीं देता।
इस संबंध में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया ने बताया कि टैटू बनवाते समय हमेशा नई और डिस्पोजेबल सुई तथा नई स्याही का ही प्रयोग होना चाहिए। किसी भी तरह की लापरवाही से एड्स जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि टैटू बनवाने से पहले उसकी जगह, इस्तेमाल होने वाले उपकरण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें तथा किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत एचआईवी जांच कराएं। यह सावधानी न सिर्फ व्यक्ति की, बल्कि उसके पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी
