In Singrauli, Aafat Sir, I am alive!’—Husband dead on paper, wife receiving widow pension for 10 years
सिंगरौली में जिंदा आदमी को मृत दिखाकर सरकारी खजाने पर डाका, पत्नी पेंशन भी लेती रही और पति से गुजारा भत्ता भी—जांच के आदेश
संवाददाता
MP Singrauli Update सिंगरौली :- मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से सिस्टम को आईना दिखाने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जिंदा व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया और उसकी पत्नी पिछले करीब दस वर्षों से विधवा पेंशन उठाती रही। मजबूर पति अब हाथ में तख्ती लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, जिस पर लिखा है—“साहब, मैं जिंदा हूं।”
यह मामला जनपद पंचायत बैढ़न अंतर्गत करसोसा गांव का है। यहां रहने वाले चंद्रवली पटेल का आरोप है कि उनकी पत्नी अजोरिया पटेल ने उन्हें कागजों में मृत दर्शाकर मायके के जीर गांव से साल 2014 से विधवा पेंशन लेना शुरू कर दिया। जबकि चंद्रवली न केवल जीवित हैं, बल्कि खुद को जिंदा साबित करने के लिए वर्षों से प्रशासनिक दफ्तरों की चौखट पर माथा टेक रहे हैं।

चंद्रवली का कहना है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े की शिकायत कलेक्टर कार्यालय, एसडीएम और स्थानीय थाने तक की, लेकिन कहीं भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर उन्होंने अनोखा विरोध शुरू किया—सरकारी दफ्तरों के बाहर तख्ती लेकर खड़े होना, ताकि सिस्टम उनकी मौजूदगी को देख सके।
विडंबना की पराकाष्ठा: पेंशन भी, गुजारा भत्ता भी-
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पत्नी पर जिंदा पति को मृत बताकर विधवा पेंशन लेने का आरोप है, उसी महिला को कोर्ट के आदेश पर चंद्रवली पटेल हर महीने 5 हजार रुपये गुजारा भत्ता भी दे रहा है। यानी एक तरफ महिला विधवा बनकर सरकारी लाभ उठा रही है, तो दूसरी तरफ पति जीवित रहते हुए भी भत्ता चुकाने को मजबूर है।
पुराने विवाद से जुड़ा मामला-
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में पत्नी ने चंद्रवली के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था, जिसके चलते उसे जेल भी जाना पड़ा। बाद में वर्ष 2018 में अदालत ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया, जिसे चंद्रवली आज तक निभा रहा है। इसी दौरान कथित रूप से उसे मृत बताकर विधवा पेंशन का खेल शुरू हुआ।
प्रशासन हरकत में –
मामला उजागर होने के बाद जिला पंचायत सिंगरौली के सीईओ जगदीश कुमार गोमे ने जनपद पंचायत बैढ़न के सीईओ से पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलते ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं और जिन गलत तथ्यों के आधार पर लाभ लिया गया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सिस्टम पर बड़ा सवाल –
यह कहानी सिर्फ एक पति-पत्नी के विवाद की नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जिसमें सरकारी कागज इंसान से ज्यादा ताकतवर हो जाते हैं। सवाल यह भी है कि आखिर किस अधिकारी के हस्ताक्षर से एक जिंदा आदमी को मृत घोषित किया गया और वर्षों तक पेंशन कैसे जारी रही?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है। फिलहाल, चंद्रवली पटेल की तख्ती सिस्टम से यही सवाल कर रही है—
“अगर मैं जिंदा हूं, तो सरकारी रिकॉर्ड में मरा क्यों हूं?”
