In Prayagraj, treatment became the cause of death; after the death of a pregnant woman, the doctor continued to drive around with her body in his car.
गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप, मौत छिपाने के लिए परिजनों को किया गुमराह; पीछा करने पर कार में मिला शव
संवाददाता नीरज कुमार शर्मा
Prayagraj Crime Update फूलपुर प्रयागराज :- प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र से चिकित्सा लापरवाही और अमानवीय व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। तीन माह की गर्भवती महिला की मौत इलाज के दौरान हो गई, लेकिन डॉक्टरों ने मौत की जानकारी परिवार को देने के बजाय शव को कार में रखकर करीब दो घंटे तक शहर में इधर-उधर घुमाया।
घटना फूलपुर थाना क्षेत्र के नरई गांव स्थित एक निजी क्लिनिक की है। यहां डॉ. सुखदेव, उनकी पत्नी डॉ. मीरा, बेटी डॉ. दीप शिखा और दामाद डॉ. सुभाषचंद्र मरीजों का इलाज करते हैं। पड़ोसी गांव आटा की रहने वाली अंगूरा देवी (25), पत्नी राजाराम, तीन महीने की गर्भवती थी।
बुधवार शाम अंगूरा देवी को पेट दर्द की शिकायत हुई। घर में कोई मौजूद न होने के कारण वह अकेले ही क्लिनिक पहुंची। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे गलत इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद उसकी हालत गंभीर हो गई और शाम करीब 7:30 बजे उसकी मौत हो गई।

मृतका के पति राजाराम के अनुसार, मौत के बाद डॉक्टरों ने सच्चाई छिपाई। डॉ. मीरा ने फोन कर बताया कि अंगूरा बेहोश हो गई है और उसे इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाया जा रहा है। जब राजाराम क्लिनिक पहुंचे तो वहां पत्नी नहीं मिली। पूछताछ करने पर पता चला कि डॉक्टर उसे कार से लेकर निकल चुके हैं।
परिजनों को शक हुआ तो उन्होंने डॉक्टरों की लोकेशन लेकर पीछा किया। रात करीब 10 बजे रहीमापुर तिराहे पर डॉक्टरों की कार को रोका गया। जब कार खोली गई तो उसमें अंगूरा देवी मृत अवस्था में पाई गई। यह देखकर परिजनों में आक्रोश फैल गया।
गुस्साए परिजन डॉक्टरों को पकड़कर फूलपुर थाने की इफको पुलिस चौकी पहुंचे, जहां देर रात तक हंगामा चलता रहा। इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर डॉ. दीप शिखा और उनके पति डॉ. सुभाषचंद्र कार छोड़कर फरार हो गए।
इसके बाद परिजन शव को गांव ले गए और पूरी रात विरोध प्रदर्शन करते रहे। गुरुवार सुबह ग्रामीणों के साथ परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
काफी समझाने-बुझाने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने सभी संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मृतका के पति, पिता और अन्य लोगों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतका के पिता संजय कुमार ने बताया कि क्लिनिक से फोन आया था कि बेटी की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उसे शहर ले जाया जा रहा है। हम लोग तलाश करते रहे, लेकिन दो से तीन घंटे बाद रहीमापुर तिराहे के पास एक कार में बेटी का शव मिला।
यह मामला न केवल चिकित्सा लापरवाही, बल्कि मौत छिपाने और साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश का भी गंभीर आरोप खड़ा करता है। अब सवाल यह है कि—
• महिला को कौन-सा इंजेक्शन लगाया गया था?
• मौत के बाद तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई?
• शव को कार में घुमाने का उद्देश्य क्या था?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
