The gas agency in Halia has become a “den of scams”! People suffer in queues, blatant extortion under the guise of uniforms, and a massive black marketing of cylinders has been exposed.
फोटो एवं वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल—कांस्टेबल पर ‘खर्चा-पानी’ लेकर लाइन तुड़वाने के आरोप, 15–20 दिन से भटक रहे उपभोक्ता; प्रशासन की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल
📍 संवाददाता –
(उ.प्र.) मिर्पज़ापुर :- धूप में इंतजार, खिड़की पर धक्का—मिर्जापुर हलिया की गैस एजेंसी में सिस्टम की सच्चाई” मिर्ज़ापुर के हलिया स्थित भारत गैस एजेंसी के बाहर लगी भारी भीड़ इस तस्वीर में साफ देखी जा सकती है। लोग घंटों से लाइन में खड़े हैं, लेकिन खिड़की पर पहुंचते ही व्यवस्था बिखरती नजर आती है। धक्का-मुक्की, भीड़ का दबाव और अंदर तक पहुंचने की होड़—यह दृश्य केवल गैस लेने की मजबूरी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और अव्यवस्था की तस्वीर बयां करता है।
तस्वीर में कुछ लोग खिड़की तक पहुंचने के लिए हाथ बढ़ाते दिख रहे हैं, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग भी भीड़ में फंसे नजर आ रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर मौजूद व्यवस्था भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम दिख रही है। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि आम जनता की परेशानी, गुस्सा और बेबसी की जमीनी हकीकत है।
मिर्ज़ापुर जिले के हलिया क्षेत्र में स्थित भारत गैस एजेंसी इन दिनों एक बड़े विवाद और कथित घोटाले का केंद्र बन चुकी है। जहां एक ओर आम जनता अपने घरों के चूल्हे जलाने के लिए गैस सिलेंडर की उम्मीद में घंटों लाइन में खड़ी रहने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर उसी व्यवस्था के भीतर कथित भ्रष्टाचार, वसूली और कालाबाजारी का ऐसा खेल चल रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह की पहली किरण के साथ ही एजेंसी के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। महिलाएं, बुजुर्ग, मजदूर—हर वर्ग के लोग लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। तपती धूप, बढ़ती बेचैनी और अनिश्चितता के बीच ये लोग सिर्फ एक उम्मीद के सहारे टिके रहते हैं—कि आज शायद उन्हें गैस मिल जाए।
वर्दी पर दाग: ‘सुरक्षा’ या ‘सौदेबाजी’?
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू है सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हलिया थाने के एक कांस्टेबल पर लगे गंभीर आरोप। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि उक्त कांस्टेबल खुलेआम ‘खर्चा-पानी’ लेकर कुछ लोगों को लाइन से हटाकर सीधे गैस दिलवा रहा है।
जहां एक ओर नियमों का पालन करने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े हैं, वहीं पैसे देने वालों को ‘VIP ट्रीटमेंट’ दिया जा रहा है। यह न केवल व्यवस्था का खुला उल्लंघन है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और ईमानदारी पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है।

वायरल फोटो एवं वीडियो ने खोली पोल-
इस कथित वसूली और अनियमितता का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। वायरल होते ही मामला आग की तरह फैल गया और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
वीडियो में कथित तौर पर कांस्टेबल को लेन-देन करते हुए दिखाया जा रहा है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं नियमों को पैसे के आगे कुचला जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आम आदमी के लिए न्याय और अधिकार केवल किताबों तक ही सीमित रह जाएंगे।
गैस सिलेंडर की कालाबाजारी का खेल?
मामला सिर्फ वसूली तक सीमित नहीं है। भारत गैस एजेंसी पर सिलेंडरों की कालाबाजारी के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे पिछले 15–20 दिनों से लगातार एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं।
बुकिंग पूरी करने और OTP मिलने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जा रहा। हर बार नए बहाने बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है—“स्टॉक खत्म हो गया”, “कल आना”, “सिस्टम बंद है”।
ऐसे में सवाल उठता है—जब आम लोगों को गैस नहीं मिल रही, तो आखिर सिलेंडर जा कहां रहे हैं? क्या यह किसी बड़े काले खेल का हिस्सा है?
जनता का गुस्सा और बेबसी-
लाइन में खड़े लोगों की आंखों में गुस्सा भी है और लाचारी भी। एक महिला उपभोक्ता ने कहा,
“हम रोज़ यहां आते हैं, घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन गैस नहीं मिलती। और कुछ लोग आते हैं, पैसे देते हैं और तुरंत सिलेंडर लेकर चले जाते हैं। क्या गरीब होना गुनाह है?”
इस तरह की बातें इस पूरे सिस्टम की हकीकत को बयां करती हैं, जहां नियम केवल आम जनता के लिए हैं और सुविधाएं पैसे वालों के लिए।
प्रशासन पर उठते बड़े सवाल,-
इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हलिया थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके क्षेत्र में इतनी बड़ी अनियमितता कैसे चल रही है?
क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है?
या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
👀 अब क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई करेगा?
क्या दोषी कांस्टेबल और एजेंसी संचालकों पर कानूनी कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
हलिया भारत गैस एजेंसी का यह मामला केवल एक एजेंसी की अव्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली खामियों और भ्रष्टाचार की कहानी बयां करता है।
अगर समय रहते इस पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो यह समस्या और गहराएगी और आम जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
👉 फिलहाल, जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—अब देखना है कि कार्रवाई होती है या फिर ‘खामोशी’ ही सबसे बड़ा जवाब बनती है।
