The news in Sadika Pavitra created a stir: Three doctors were found missing from the Civil Hospital, and the Collector issued a show-cause notice.
ओपीडी में खाली मिली डॉक्टरों की कुर्सियां, मरीज घंटों रहे परेशान; संतोषजनक जवाब न मिलने पर एक साल की वेतन वृद्धि रोकने की चेतावनी
संवाददाता मुस्ताक अहमद
Hospital Mauganj Update – मऊगंज जिले का सिविल अस्पताल इन दिनों इलाज का नहीं, बल्कि लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का अड्डा बनता जा रहा है। जिन डॉक्टरों पर मरीजों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वही ड्यूटी के समय अस्पताल से गायब मिल रहे हैं और गरीब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं हालात इतने बदतर थे कि ओपीडी के समय अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं, लेकिन जिन डॉक्टरों को वहां मौजूद होना चाहिए था, उनकी कुर्सियां खाली पड़ी थीं। दूर-दराज गांवों से उम्मीद लेकर आए मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टर साहबों का कहीं अता-पता नहीं था लगातार मिल रही शिकायतों के बाद डिप्टी कलेक्टर पवन गौरैया ने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी।
मीडिया की खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन
मऊगंज जिले के सिविल अस्पताल की लचर व्यवस्था को लेकर जब “सादिका पवित्र” राष्ट्रीय समाचार पत्र में खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए औचक निरीक्षण कराया, जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही उजागर हो गई।

ओपीडी में लगी रही मरीजों की कतार-
निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि ओपीडी के समय अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी, लेकिन जिन डॉक्टरों को वहां मौजूद रहकर मरीजों का इलाज करना चाहिए था, उनकी कुर्सियां खाली पड़ी थीं। दूर-दराज गांवों से आए मरीज घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टरों का कहीं अता-पता नहीं था।
मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है जब डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
औचक निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल-
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद डिप्टी कलेक्टर पवन गौरैया ने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जांच के दौरान ओपीडी में तैनात डॉक्टर कुमुद पाठक और रुपेश वर्मा ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। वहीं अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी बीएमओ डॉ. प्रद्युम्न शुक्ला भी बिना किसी सूचना या स्वीकृत अवकाश के अस्पताल से गायब मिले।
कलेक्टर ने दिखाई सख्ती-
जैसे ही निरीक्षण की रिपोर्ट कलेक्टर संजय जैन के पास पहुंची, उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि ड्यूटी के समय अस्पताल से अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही है और यह सीधे तौर पर गरीब मरीजों के अधिकारों के साथ अन्याय है।
वेतन वृद्धि रोकने की चेतावनी-
कलेक्टर ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि संबंधित डॉक्टरों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोकने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का स्पष्ट उल्लंघन है।
लापरवाही पर उठे बड़े सवाल-
सिविल अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति मरीजों की परेशानी को और बढ़ा रही है।
जनता ने की सख्त कार्रवाई की मांग-
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद लोगों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिर्फ नोटिस जारी करने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। लोगों ने मांग की है कि लापरवाह डॉक्टरों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो आगे के लिए एक उदाहरण बन सके।
फिलहाल, प्रशासन की इस सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल जरूर बढ़ गई है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या वास्तव में अस्पताल की व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।
