वर्षों से अधूरी है जनता की उम्मीद — सर्वे, स्वायल टेस्ट और आश्वासन के बाद भी नहीं रखी गई नींव, पांटून पुल ही बना सहारा
संवाददाता – आलोपी शंकर शर्मा
प्रयागराज। मेजा – गंगा की लहरों के बीच वर्षों से विकास की नाव हिचकोले खा रही है। मेजा यमुनापार और हंडिया गंगापार को जोड़ने वाले स्थायी पुल की मांग दशकों से की जा रही है, लेकिन आज भी यह सपना अधूरा है।
सर्वे, स्वायल टेस्ट और फाइल तैयार होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। हर बार चुनाव आते हैं, वादे होते हैं, पर गंगा के ऊपर अब तक सिर्फ अस्थायी पांटून पुल ही बनता है — जो कुछ महीनों बाद बहा दिया जाता है।
4800 करोड़ की योजना ठंडी पड़ी, चुनाव ने रोका निर्माण
चार वर्ष पूर्व पूर्व विधायक नीलम करवरिया की पहल पर सेतु निगम की टीम ने परानीपुर गंगाघाट का सर्वे किया और स्वायल टेस्ट पूरा किया था।
कुल लागत 4800 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बन जाने से गंगापार और यमुनापार के बीच सीधा व्यापारिक और सामाजिक संपर्क स्थापित होगा, जिससे क्षेत्र का तेजी से विकास संभव है।
पांटून पुल बना अस्थायी राहत, खतरे में सफर-
लोक निर्माण विभाग द्वारा हर साल गंगा पर अस्थायी पांटून पुल लगाया जाता है, लेकिन यह सिर्फ छह महीने चलता है।
बाढ़ आते ही इसे हटा दिया जाता है, और लोग नावों के सहारे सफर करते हैं। कई बार नाव पलटने से हादसे हो चुके हैं।
व्यापारी नेता आलोक शुक्ला कहते हैं —
हर साल पुल बनना और तोड़ना अब थकान बन चुका है। स्थायी पुल बनेगा, तो व्यापार और आवागमन दोनों की मुश्किलें खत्म होंगी।
छात्र, किसान और व्यापारी — सब प्रभावित-
गंगापार के गांवों के छात्र सिरसा और मेजा के कॉलेजों में पढ़ने के लिए रोज नाव से जाते हैं। बारिश के समय यह सफर जानलेवा बन जाता है।
किसान अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में कठिनाई झेलते हैं, जबकि व्यापारी बताते हैं कि ग्राहक गंगा पार से प्रयागराज शहर चले जाते हैं, जिससे स्थानीय बाजार को नुकसान होता है।
सिरसा कस्बे के व्यापारी श्री भगवान केशरी कहते हैं —
“गंगा के पार से लोग खरीददारी करने प्रयागराज चले जाते हैं। पक्का पुल बन जाए तो व्यापार में नई जान आ जाएगी।
धरना, हस्ताक्षर अभियान और अधूरे वादे-
सामाजिक कार्यकर्ता रामशिरोमणि तिवारी ने पुल निर्माण को लेकर पदयात्रा और हस्ताक्षर अभियान चलाया था।
उन्होंने तत्कालीन सांसद डॉ. रीता जोशी और कई केंद्रीय मंत्रियों को पत्र भेजे।
बसपा शासनकाल में पूर्व विधायक आनंद कुमार पांडेय ने मुख्यमंत्री मायावती से पुल के लिए बजट मांगा, लेकिन हर बार आश्वासन मिला, काम नहीं हुआ।
जनप्रतिनिधियों ने क्या कहा-
उज्ज्वल रमण सिंह, सांसद (मेजा क्षेत्र): “गंगा पर स्थायी पुल का मुद्दा बेहद अहम है। मैं इसे संसद में जोरदार तरीके से उठाऊंगा। यह सिर्फ एक निर्माण नहीं, क्षेत्र के विकास की रीढ़ है।”
अखिलेश सोनकर, किसान नेता:-
“पक्का पुल बनने से किसानों की तरक्की होगी, फसलें और सब्ज़ियां आसानी से बाजार पहुंचेंगी। सरकार को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए।”
जनता की आवाज़ –
हर साल पुल का सर्वे होता है, पर नींव नहीं रखी जाती। — मनीष तिवारी, लखनपुर
हमारे बच्चे नाव से स्कूल जाते हैं, डर के साए में। — अनिल यादव,
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था, पर अबतक काम शुरू नहीं हुआ। —
पुल बनेगा तो मेजा में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। — शिवम केशरी, सिरसा गंगाघाट
आवाज़ एक — “गंगा पर पुल बने, विकास आगे बढ़े”
स्थानीय लोग कहते हैं, “अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। गंगा पार और यमुनापार को जोड़ने वाला यह पुल केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सैकड़ों गांवों की जीवनरेखा है।
लोगों की उम्मीद अब भी बरकरार है—
जिस दिन परानीपुर में पक्का पुल बनेगा, उस दिन मेजा का असली विकास शुरू होगा।
