Message of brotherhood mixed in colors: Joy overflowed with the tunes of Fagua in Meja-Uruwa
जगेपूर के हनुमान मंदिर परिसर में रंगारंग आयोजन, युवाओं ने संभाली जिम्मेदारी; गुलाल लगाकर ग्रामीणों ने दिया एकता और सौहार्द का संदेश
संवाददाता – नीरज कुमार शर्मा
Holi Update Prayagraj – देशभर में रंगों का पर्व होली इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह होते ही शहरों से लेकर गांवों तक रंग और गुलाल की फुहारें उड़ती नजर आईं। हर ओर ढोल-नगाड़ों की थाप, फगुआ के गीतों और “बुरा न मानो, होली है” की गूंज के साथ लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ त्योहार की शुरुआत हुई और जगह-जगह सामूहिक उत्सव का माहौल देखने को मिला।
इसी क्रम में प्रयागराज जनपद के मेजा और उरुवा क्षेत्र में होली का उत्सव खास अंदाज में मनाया गया। गांवों में फगुआ के पारंपरिक गीतों की मधुर धुन पर ग्रामीण झूमते नजर आए। रंग और गुलाल के बीच लोगों ने आपसी मतभेद भुलाकर गले मिलकर भाईचारे की मिसाल पेश की। पूरे इलाके में उत्सव का ऐसा माहौल रहा मानो हर गली और चौपाल रंगों से सराबोर हो उठी हो।

उरुवा क्षेत्र के कोटहा अंतर्गत जगेपूर ग्राम पंचायत में स्थित हनुमान मंदिर परिसर में फगुआ का विशेष रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव के बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। अबीर-गुलाल उड़ाते हुए ग्रामीणों ने पारंपरिक होली गीतों पर ताल मिलाई और सामूहिक रूप से पर्व का आनंद लिया। बुजुर्गों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी गरिमा प्रदान की।
इस आयोजन की पूरी जिम्मेदारी गांव के युवाओं ने उत्साह और समर्पण के साथ संभाली। सोनू पाण्डेय, मोनू पाण्डेय, गौरव पाण्डेय, दीपक पाण्डेय, मनीष पाण्डेय, दिवस पाण्डेय, ज्वाला प्रसाद प्रजापति और संदीप प्रजापति ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रयासों की सराहना उपस्थित ग्रामीणों और बुजुर्गों ने खुले दिल से की।
बुजुर्गों ने कहा कि आज के दौर में जहां युवा पीढ़ी व्यस्तताओं के कारण सामाजिक मेलजोल से दूर होती जा रही है, वहीं जगेपूर के युवाओं ने होली के माध्यम से समाज को एकजुट करने का सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने इसे गांव की एकता और सामूहिक संस्कृति को मजबूत करने वाला कदम बताया।
समारोह के अंत में सभी ग्रामीणों ने “बुरा न मानो, होली है” के भाव के साथ पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस प्रकार मेजा-उरुवा क्षेत्र में मनाई गई होली केवल रंगों का त्योहार नहीं रही, बल्कि यह प्रेम, एकता और सामाजिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई।
