देवरी पंचायत में महा-घोटाले का विस्फोट: सरपंच की जेठानी का ‘रिश्वत कांड’ ऑडियो वायरल, 5 लाख की डिमांड ने मचाया हड़कंप!
देवरी/परसौना: भ्रष्टाचार की दलदल में डूबी देवरी ग्राम पंचायत की सरपंच का काला चिट्ठा अब सार्वजनिक होने लगा है। परसौना बाजार की नीलामी में गुंडागर्दी और कमीशनखोरी के जिस खेल की चर्चा गलियारों में थी, उसका सबसे घिनौना सबूत अब जनता के हाथ लग गया है। सरपंच की जेठानी का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर बिजली की तरह दौड़ रहा है, जिसमें वह सत्ता के नशे में चूर होकर सरेआम रिश्वत की डिमांड करती सुनाई दे रही हैं।
रिश्वत की ‘सुपारी’: जेठानी के जरिए वसूली का गंदा खेल
वायरल ऑडियो ने यह साफ कर दिया है कि देवरी पंचायत में सरपंच सिर्फ एक मुखौटा हैं, जबकि भ्रष्टाचार का रिमोट कंट्रोल उनके परिवार और दलालों के हाथ में है। ऑडियो में सरपंच की जेठानी द्वारा नरेंद्र दुबे से 5 लाख रुपये की अवैध मांग की जा रही है। यह सीधे तौर पर सरकारी नीलामी की प्रक्रिया को बंधक बनाने और डकैती डालने जैसा है।
जनता पूछ रही है— क्या अब पंचायतें परिवारवाद और वसूली का केंद्र बन गई हैं? नीलामी 4 लाख 4 हजार की हुई, लेकिन ‘कमीशनखोर परिवार’ को ऊपर से 5 लाख की ‘जजिया’ चाहिए। यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है!
खुलेगी पाप की गठरी: बारी-बारी से बाहर आएंगे घोटाले!
यह तो सिर्फ शुरुआत है! परसौना बाजार का मामला तो महज एक झांकी है, सरपंच के पूरे कार्यकाल की असली फिल्म तो अभी बाकी है। सूत्रों का कहना है कि सरपंच के कार्यकाल में हुए हर निर्माण कार्य, हर सरकारी योजना और हर फंड में बंदरबांट की गई है।
फर्जी मस्टर रोल का खेल हो या विकास कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग, अब हर घोटाले की पोल बारी-बारी से खुलेगी। * पंचायत के फंड को अपनी निजी जागीर समझने वालों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
प्रशासन के आदेश को ठेंगा: CEO की मर्यादा दांव पर!
जनपद सीईओ (CEO) के आदेश को कूड़े के ढेर पर रखने वाली सरपंच ने यह दिखा दिया है कि उन्हें कानून का कोई भय नहीं है। जब उच्चतम बोली लगाने वाले नरेंद्र दुबे के पास वैध दस्तावेज और प्रशासनिक आदेश हैं, तो फिर किस हैसियत से सरपंच और उनका परिवार इस प्रक्रिया को रोक रहा है? क्या जिला प्रशासन इस ‘गुंडागर्दी’ के आगे सरेंडर कर चुका है?
जनता का आक्रोश: अब आर-पार की जंग!
वायरल ऑडियो ने जलती आग में घी का काम किया है। देवरी और परसौना की जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है।
“भ्रष्टाचार की इस महारानी और उनके वसूली एजेंटों को अब सलाखों के पीछे होना चाहिए।” चेतावनी: अगर 24 घंटे के भीतर नरेंद्र दुबे को अधिकार पत्र नहीं सौंपा गया और इस वायरल ऑडियो पर संज्ञान लेते हुए सरपंच के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब भ्रष्टाचार की हर फाइल खुलेगी, हर लूट का हिसाब होगा और देवरी की धरती से इस ‘कमीशनराज’ का अंत होगा!
