सिंगरौली भाजपा में ‘वसूली’ का तांडव, जिला अध्यक्ष के ‘कमंडल’ में संगठन की बलि!
सिंगरौली। क्या भारतीय जनता पार्टी का जिला कार्यालय अब ‘उगाही केंद्र’ बन चुका है? सिंगरौली की राजनीति में यह सवाल अब दबी जुबान में नहीं, बल्कि चीख-चीख कर गलियारों में गूंज रहा है। संगठन के शीर्ष पद पर बैठे जिला अध्यक्ष की कार्यशैली ने अनुशासन की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। विश्वस्त सूत्रों और जमीनी कार्यकर्ताओं के आक्रोश से यह साफ है कि जिला अध्यक्ष को संगठन चलाने का तरीका सिंगरौली विधायक से सीखने की सख्त जरूरत है, जो जनसेवा और विकास की राजनीति के पर्याय बने हुए हैं।
संगठन की आड़ में ‘वसूली का कमंडल’
सबसे चौंकाने वाला और गंभीर आरोप यह है कि जिला अध्यक्ष के अधिकतर ‘कमंडल’ (करीबी सिपहसालार और गुट) केवल और केवल ‘वसूली’ में व्यस्त हैं। सूत्रों का दावा है कि संगठन के कार्यक्रमों से ज्यादा ध्यान इस बात पर रहता है कि कहां से और कैसे ‘आर्थिक लाभ’ निचोड़ा जाए।
अंदरूनी सूत्रों का बड़ा खुलासा: “जिला अध्यक्ष की पूरी टीम एक ‘कलेक्शन एजेंट’ की तरह काम कर रही है। जिले के प्रशासनिक गलियारों से लेकर ठेकेदारी तक, हर जगह इनके ‘कमंडल’ वसूली के लिए तैनात हैं। कार्यकर्ताओं के सम्मान की जगह अब ‘मलाई’ ने ले ली है।”
‘अदृश्य नेत्री’ का मायाजाल: कौन है पर्दे के पीछे का खिलाड़ी?
कार्यकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा नफरत और नाराजगी उस ‘अदृश्य नेत्री’ को लेकर है, जिसके इशारे पर जिला अध्यक्ष कठपुतली की तरह नाच रहे हैं। चर्चा है कि संगठन के भीतर एक समानांतर सत्ता चल रही है।
दखलअंदाजी: नियुक्तियों से लेकर फैसलों तक में इस अदृश्य नेत्री का वीटो पावर चलता है।
अपमान: पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को इस नेत्री के कारण जलील होना पड़ रहा है।
असंतोष: ‘अदृश्य शक्ति’ के इस अहंकार ने कार्यकर्ताओं के भीतर विद्रोह की ज्वाला भड़का दी है।
विधायक की साख और अध्यक्ष की ‘भ्रष्ट’ शैली
एक तरफ सिंगरौली विधायक अपनी मेहनत और साफ-सुथरी छवि से जनता का दिल जीत रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला अध्यक्ष का ‘वसूली तंत्र’ पार्टी की साख को मिट्टी में मिला रहा है। कार्यकर्ताओं का सीधा सवाल है—क्या जिला अध्यक्ष केवल ‘मलाई’ काटने के लिए पद पर बैठे हैं? ### बगावत की आहट: ‘घर बैठने’ को मजबूर निष्ठावान सिपाही
पार्टी के पुराने सिपाही अब इस ‘वसूली संस्कृति’ और ‘अदृश्य नेत्री’ के आतंक से तंग आकर घर बैठने को मजबूर हैं। सूत्रों की मानें तो कार्यकर्ताओं का एक बड़ा गुट अब प्रदेश नेतृत्व तक जिला अध्यक्ष के ‘कमंडल’ की काली करतूतों और वसूली के साक्ष्य पहुंचाने की तैयारी कर चुका है।
खबर का लब्बोलुआब:
वसूली बाजी: जिला अध्यक्ष और उनके करीबियों पर अवैध उगाही के संगीन आरोप।
नेतृत्व की विफलता: विधायक की सक्रियता के आगे अध्यक्ष की कार्यशैली ‘शून्य’ और विवादित।
गुलाम संगठन: एक ‘अदृश्य नेत्री’ के हाथों की कठपुतली बना जिला नेतृत्व।
कार्यकर्ता आक्रोश: ‘कमंडल’ की वसूली नीति के खिलाफ संगठन के भीतर बड़े विद्रोह के संकेत।
चेतावनी: यदि समय रहते इस ‘वसूली गैंग’ और ‘अदृश्य नेत्री’ के प्रभाव को खत्म नहीं किया गया, तो सिंगरौली में भाजपा का अभेद्य किला अपने ही ‘कमंडल’ के बोझ से ढह जाएगा।
