“मरने के 24 साल बाद बना मृत्यु प्रमाण पत्र!” — 42 किता जमीन हड़पने का खेल, गोविन्द उपाध्याय, दुर्गेश, बबोलेराम और राधिका प्रसाद पर गंभीर आरोप!
वैढन, सिंगरौली।
सिंगरौली जिले में जमीन हड़पने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 42 किता जमीन पर कब्जा जमाने के लिए पहले फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया गया, फिर एक नहीं बल्कि दो-दो वसीयत तैयार कर दी गईं।
ग्राम पचौर निवासी प्रिन्स शुक्ला और सूचित शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक सिंगरौली को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि ग्राम धतुरा पोखरा की 42 किता भूमि, जो मृतक कलावती पत्नी रामदत्त शुक्ला के नाम सहखाते में दर्ज थी, उसे हड़पने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
शिकायत में गोविन्द उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, बबोलेराम उपाध्याय और राधिका प्रसाद उपाध्याय को मुख्य आरोपी बताया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने पहले फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, फिर जमीन अपने नाम कराने के लिए वसीयतनामा का खेल शुरू कर दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि कलावती की मृत्यु वर्ष 1989 में हो चुकी थी, लेकिन रिकॉर्ड में 2013 का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा दिया गया। यानी कागजों में मृतका को 24 साल बाद फिर से “मृत” घोषित कर दिया गया।
इसके बाद कथित तौर पर 21 नवंबर 2012 की वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए तहसील न्यायालय में आवेदन लगाया गया। मामला नायब तहसीलदार न्यायालय पहुंचा, जहां 20 दिसंबर 2023 को यह आवेदन खारिज कर दिया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि पहली वसीयत फेल होते ही 31 दिसंबर 2012 की दूसरी वसीयत भी तैयार कर ली गई। उसी के आधार पर 16 जुलाई 2024 को फिर से नामांतरण का आवेदन दे दिया गया।
बताया गया कि नायब तहसीलदार बुद्धसेन माझी के न्यायालय में दर्ज प्रकरण में 30 दिसंबर 2024 को गोविन्द उपाध्याय और बबोलेराम के पक्ष में नामांतरण आदेश भी पारित कर दिया गया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे खेल में पटवारी, नोटरी और कुछ राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से चुपचाप रिपोर्ट तैयार कर जमीन का नामांतरण करा दिया गया। बाद में 6 जनवरी 2025 को यह आदेश निरस्त भी कर दिया गया, लेकिन आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में अब भी आरोपियों का नाम दर्ज है।
प्रार्थियों का कहना है कि इस पूरे मामले में फर्जी वसीयत, कूटरचना, प्रतिरूपण और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक सिंगरौली से मांग की है कि गोविन्द उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, बबोलेराम उपाध्याय और राधिका प्रसाद उपाध्याय सहित अन्य आरोपियों पर आईपीसी की धारा 467, 468, 420 आदि के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि —
जब मृतका की मृत्यु 1989 में हो चुकी थी, तो 2013 में बना मृत्यु प्रमाण पत्र किस चमत्कार से जारी हो गया? और एक ही जमीन के लिए दो-दो वसीयत आखिर किस “कागजी कारखाने” में तैयार हुईं?
