The health system in the new district of Mauganj is under scrutiny, raising serious questions about the arrangements at the government hospital.
बीएमओ प्रद्युम्न शुक्ला के कार्यकाल में व्यवस्थाओं पर सवाल, दवा वितरण और महिला कर्मचारियों के साथ मानसिक प्रताड़ना का आरोप को लेकर चर्चा
संवाददाता – मुस्ताक अहमद
मऊगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर जनता में आक्रोश
Mauganj hospital मऊगंज।- नवीन जिला बनने के बाद जहां लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास की उम्मीद थी, वहीं अब मऊगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है। सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में मिलने वाली सुविधाएं कागजों में तो पूरी दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। इलाज के लिए आने वाले कई मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि यहां आवश्यक संसाधन या सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करने की सलाह दी जाती है।

इन आरोपों के केंद्र में सरकारी अस्पताल मऊगंज के बीएमओ प्रद्युम्न शुक्ला का नाम भी चर्चा में है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में अव्यवस्था, लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों की ओर भेजे जा रहे मरीज-
सूत्रों के अनुसार मऊगंज के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कई बार यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि यहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद उन्हें निजी अस्पतालों में इलाज कराने की सलाह दी जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ मरीजों को विशेष निजी अस्पतालों के नाम बताए जाते हैं और कहा जाता है कि वहां डॉक्टर का नाम बताने पर खर्च कम हो जाएगा। इस तरह की बातें सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि कहीं मरीजों को कमीशन के खेल के तहत निजी अस्पतालों की ओर तो नहीं भेजा जा रहा।
मुफ्त दवाओं की व्यवस्था पर भी उठे सवाल-
सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की व्यवस्था की जाती है, लेकिन आरोप है कि मऊगंज के सरकारी अस्पताल में इस व्यवस्था का लाभ मरीजों को सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि कई बार अस्पताल में उपलब्ध दवाएं मरीजों तक पहुंचने के बजाय समय गुजरने के बाद कूड़ेदान में फेंक दी जाती हैं। वहीं मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार माना जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रही समुचित सुविधा
सरकार द्वारा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं और मिशन चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव की सुविधा देना है।
लेकिन मऊगंज में स्थिति को लेकर अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।
महिला कर्मचारी से मानसिक प्रताड़ना की चर्चा-
अस्पताल के अंदरूनी माहौल को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को मानसिक रूप से परेशान किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कार्यस्थल पर लगातार दबाव और अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों के बीच भी असंतोष का माहौल बनता जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
उच्च अधिकारियों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय-
इन सभी आरोपों और चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब तक इस मामले में चुप क्यों हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर से जनता का भरोसा डगमगा सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
नए जिले से लोगों को थीं बड़ी उम्मीदें-
जब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मऊगंज को नया जिला घोषित किया था, तब लोगों को उम्मीद थी कि यहां विकास की नई राह खुलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।
लेकिन अब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल उन उम्मीदों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब जवाब की प्रतीक्षा-
मऊगंज के सरकारी अस्पताल को लेकर उठ रहे आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या सचमुच मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भेजा जा रहा है?
क्या सरकारी दवाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा?
क्या गर्भवती महिलाओं को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा?
और क्या महिला कर्मचारी के साथ मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच होगी?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को देने होंगे।
