नाम स्पा का, काम शर्म का — नवानगर में ‘खुशी’ के नाम पर बदनामी का कारोबार!”
“स्पा की आड़, देह का व्यापार — नवानगर में ‘खुशी’ का काला सच!”
सिंगरौली संवाददाता
सिंगरौली जिले को ऊर्जांचल के रूप में अपनी पहचान बना चुके सिंगरौली जिले की छवि इन दिनों शहर में तेजी से खुल रहे स्पा सेंटरों की वजह से सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर स्पा सेंटर की आड़ में कथित रूप से देह व्यापार जैसे अवैध गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे शहर का माहौल प्रभावित हो रहा है और युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शहर में स्पा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई स्थानों पर इनकी गतिविधियों को लेकर लगातार संदेह जताया जा रहा है। चर्चा है कि कुछ स्पा सेंटर केवल नाम मात्र के हैं, जबकि अंदर संदिग्ध गतिविधियां संचालित होती हैं। आरोप यह भी है कि कुछ जगहों पर दिन में सामान्य स्पा सेवा के नाम पर काम होता है, जबकि रात के समय ‘सप्लाई’ के नाम पर लड़कियों को भेजे जाने जैसी गतिविधियों की चर्चा शहर में आम है।
कई बार हुई शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं..?
बताया जा रहा है कि बीते कई महीनों में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इन स्पा सेंटरों को लेकर पुलिस प्रशासन और नगर निगम को शिकायतें भी दी गई हैं। कई बार ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई देखने को नहीं मिली। इसी कारण अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप झेल रहे संचालकों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं।
प्रमुख इलाकों में संचालित हो रहे स्पा सेंटर जब की स्थानीय लोगों के अनुसार बैढ़न कोतवाली थाना क्षेत्र में गर्ल्स हॉस्टल से करीब 100 मीटर की दूरी पर मुख्य मार्ग पर एक स्पा सेंटर संचालित है। वहीं । उस समय कुछ दिनों तक गतिविधियां बंद रहीं, लेकिन बाद में फिर से संचालन शुरू होने की बात सामने आई है।
माजन मोड़ से लेकर नवानगर थाना क्षेत्र तक कई स्पा सेंटर संचालित होने की चर्चाएं हैं। इनमें से एक स्पा सेंटर से जुड़ा ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा भी किया जाता है, हालांकि इस मामले में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्पा सेंटर की पहले भी सामने आ चुकी हैं घटनाएं…
स्पा सेंटरों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। एक मामले में विवाद के दौरान एक मैनेजर की मौत की घटना सामने आई थी, वहीं एक अन्य घटना में एक व्यक्ति के छत से गिरने की खबर ने भी शहर में चर्चा पैदा की थी। इन घटनाओं के बाद जांच की बात तो हुई, लेकिन आम लोगों के बीच परिणाम को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।
स्पा सेंटर के कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं होने का खेल..
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्पा सेंटरों में काम करने वाली लड़कियों का न तो पुलिस के पास कोई स्पष्ट रिकॉर्ड है और न ही नगर निगम के पास। यह भी कहा जा रहा है कि समय-समय पर कर्मचारियों को बदल दिया जाता है और उनकी जानकारी कहीं दर्ज नहीं होती। ऐसे में यदि कोई घटना घटती है तो पहचान और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो सकता है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल..
लगातार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से लोगों के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि जिले में स्पा सेंटरों की संख्या बढ़ रही है तो उनकी नियमित जांच और लाइसेंस सत्यापन भी जरूरी है।
कम्युनिस्ट पार्टी के नेता संजय व समाजसेवी सुषमा वर्मा ,स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि जिले में संचालित सभी स्पा सेंटरों की जांच कराई जाए, कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए और बिना लाइसेंस या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले स्पा सेंटरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित निरीक्षण और छापेमारी की भी मांग की जा रही है।
अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर टिकी है कि वे इस मामले को लेकर क्या कदम उठाते हैं और शहर में बढ़ रही इन गतिविधियों पर किस तरह अंकुश लगाया जाता है।
इन सभी मामलों को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन जिला पुलिस अधीक्षक पत्रकारों का फोन उठाना उचित नहीं समझते जिससे प्रशासनिक पक्ष को नहीं रखा जा सका…
