Dalelnagar’s historic pond is dying from neglect and filth, a water source struggling to survive.
फूलबेहड़ ब्लॉक के चकवा बाजार में तालाब और मंदिर की हालत बदहाल; सफाई व संरक्षण न होने से बढ़ा अतिक्रमण और गंदगी, स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
ब्यूरो अंशु वर्मा
Lakhimpur Kheri update लखीमपुर :- खीरी जिले के फूलबेहड़ ब्लॉक अंतर्गत दलेलनगर, पोस्ट कंचनपुर स्थित चकवा बाजार का पुराना तालाब इन दिनों गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रहा है। कभी क्षेत्र के प्रमुख जलस्रोत के रूप में पहचाना जाने वाला यह सरोवर अब घास-फूस, झाड़ियों और गंदगी से पटता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालाब के रखरखाव और नियमित सफाई की व्यवस्था न होने के कारण इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। तालाब के पास स्थित मंदिर परिसर की हालत भी बदहाल होती जा रही है। बरसात के मौसम में कुछ दिनों के लिए यहां पानी जरूर भर जाता है, लेकिन साफ-सफाई और संरक्षण के अभाव में वह जल्द ही गंदगी में तब्दील हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तालाब की सफाई और संरक्षण का काम शुरू किया गया होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। तालाब में जमा गंदगी और झाड़ियों के कारण मच्छर और मक्खियों की संख्या बढ़ रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तालाब के आसपास अतिक्रमण की समस्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि इस मुद्दे पर लोग खुलकर बोलने से कतराते हैं, क्योंकि आवाज उठाने पर विवाद और झगड़े की आशंका बनी रहती है। कुछ लोगों का कहना है कि पहले भी इस विषय पर आवाज उठाने की कोशिश की गई, लेकिन विवाद की स्थिति बनने के कारण लोग पीछे हट गए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन और ग्राम पंचायत समय रहते पहल करे तो इस तालाब को बचाया जा सकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तालाब की सफाई, अतिक्रमण हटाने और संरक्षण की ठोस योजना लागू करने की मांग की है।
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब और अन्य जलस्रोत केवल पानी के भंडार नहीं होते, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये जलस्रोत भूजल स्तर को बनाए रखने, तापमान को नियंत्रित करने और जल निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था को सुचारू रखने में मदद करते हैं।
कभी चकवा बाजार क्षेत्र अपने तालाबों और जलस्रोतों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इनका लगातार खत्म होना पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है। यदि समय रहते गंदगी, झाड़ियों और अतिक्रमण पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह ऐतिहासिक तालाब पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जिससे क्षेत्र में जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
