This is Uttar Pradesh, Guru! Even death has lost to the system here—a dead man collected pensions for seven years, and his family has accused the government of fraud.
कैसरबाग का सनसनीखेज मामला, 2017 में हो चुकी थी मौत, 2023 तक खाते में आती रही पेंशन—फर्जी दस्तावेज और अंगूठे के खेल से लाखों का गबन
ब्यूरो रिपोर्ट
Pension Scam Lucknow लखनऊ।-
उत्तर प्रदेश में सरकारी सिस्टम की पोल खोल देने वाला एक चौंकाने वाला मामला राजधानी लखनऊ से सामने आया है। यहां एक रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के बाद भी उसके नाम पर लगातार सात साल तक पेंशन निकलती रही। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ परिवार के ही लोगों ने फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के जरिए किया। जब मामला उजागर हुआ तो पेंशन विभाग से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मच गया।
यह पूरा मामला कैसरबाग क्षेत्र का है। यहां रहने वाले पुत्तीलाल वर्ष 2002 में लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें नियमित रूप से सरकारी पेंशन मिल रही थी। लेकिन वर्ष 2017 में पुत्तीलाल की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद उनके नाम से पेंशन की रकम 2023 तक खाते में आती रही।
ऐसे हुआ सरकारी खजाने से खेल-
जांच में सामने आया कि पुत्तीलाल की मौत के बाद उनके बेटे रामबहादुर, दो पोते और भाई ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। आरोप है कि इन्होंने
फर्जी दस्तावेज तैयार कराए,
तीन अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए, और पुत्तीलाल के नाम पर पेंशन निकलवाते रहे।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि रामबहादुर ने अपने ताऊ का अंगूठा लगवाकर पेंशन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कराईं, जिससे विभाग को शक न हो।
भतीजे की शिकायत से खुला राज-
इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब रामबहादुर के भतीजे आयुष को इस अनियमितता की जानकारी मिली। उसने मामले की शिकायत सीधे लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन से कर दी। शिकायत मिलते ही पेंशन विभाग के अधिकारी हरकत में आए और जांच शुरू की गई।
जांच में पुष्टि हुई कि पुत्तीलाल की मौत 2017 में ही हो चुकी थी और उसके बाद भी वर्षों तक उनके नाम पर पेंशन उठाई जाती रही।
एफआईआर दर्ज, जांच तेज-
मामला उजागर होते ही पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी धन के गबन की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि
अब यह पता लगाया जा रहा है कि कुल कितनी रकम की हेराफेरी हुई, और इस फर्जीवाड़े में कोई सरकारी कर्मचारी शामिल था या नहीं।
पुलिस ने साफ किया है कि जांच के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों से सरकारी धन की वसूली भी की जाएगी।
बड़ा सवाल-
यह मामला न सिर्फ परिवार की धोखाधड़ी को उजागर करता है, बल्कि सरकारी पेंशन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।
जब मौत के बाद भी पेंशन चलती रही, तो सिस्टम आखिर सो क्या रहा था? अब देखना होगा कि जांच के बाद इस ‘मुर्दा पेंशन कांड’ में कितने चेहरे बेनकाब होते हैं और सरकार इस लापरवाही पर क्या कदम उठाती है।
