सबूत मिले, एफआईआर हुई, फिर भी ठोस कार्रवाई शून्य, एनसीएल एवं सतर्कता तंत्र संदेह के घेरे में
सिंगरौली । एनसीएल सिंगरौली की दुद्धिचुआ परियोजना के तौल कांटा में दिसम्बर महीने के प्रथम-द्वितीय सप्ताह में चीप व रिमार्ट मिलने के मामले में एनसीएल के साथ-साथ केन्द्रीय सतर्कता अमले की रहस्यमयी चुप्पी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जबकि मौके पर अनियमितता के साक्ष्य भी मिले हैं, केवल यूपी के शक्तिनगर थाना में संबंधित जनों के विरूद्ध एफआईआर कर कोरमपूर्ति मान ली गई है। यदि विजिलेंस विभाग एवं एनसीएल जांच टीम यदि कार्रवाई की है तो सार्वजनिक करने में परहेज क्यों किया जा रहा है। इससे पूरे मामले में संदेह और भी गहरा होता जा रहा है।
शिकायतकर्ता राजेश सोनी ने 16 दिसंबर 2025 को केंद्रीय सतर्कता अधिकारी को औपचारिक पत्र लिखकर दुद्धिचुआ परियोजना के तौल कांटा में चीप एवं रिमोट के माध्यम से बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खुलासा हुआ था। इसके बावजूद सवाल यह है कि जब शिकायत, सबूत मौजूद थे, तो एफआईआर तक ही कार्रवाई क्यों हुई ? आरोप है कि दुद्धिचुआ परियोजना में निजी लाभ के लिए शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। नापतोल में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद फॉर्म वेट ट्रैक इंडिया लिमिटेड का नाम सीधे तौर पर सामने आया। नियमों के अनुसार इतना बड़ा मेजर फॉल्ट सामने आने पर संबंधित कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन आज तक न तो कंपनी पर कोई कठोर कार्रवाई दिखाई दी और न ही किसी तरह की दंडात्मक प्रक्रिया सार्वजनिक की गई। इस पूरे मामले में सीमावर्ती थाना शक्तिनगर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता निभाई गई, फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आरोप है कि जानबूझकर जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया, ताकि मामला धीरे-धीरे दब जाए। सबसे बड़ा सवाल अब एनसीएल, सीसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी की भूमिका और उनकी चुप्पी को लेकर उठ रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिस समय मामले में निर्णायक कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसी दौरान केंद्रीय सतर्कता अधिकारी अभी तक कार्रवाई आगे नही बढ़ाया। इसी बात को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल खड़ा किया है।
विजिलेंस के यहां पहुंची शिकायत, मांगा पहचान प्रमाण
कोयला क्षेत्र में उठी शिकायत की आंच अब सीधे एनसीएल के विजिलेंस विभाग तक पहुंच चुकी है। एनसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी कार्यालय से शिकायत के सत्यापन को लेकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से औपचारिक पत्र जारी किया गया है। यह पत्र बीते 21 जनवरी को जारी हुआ, जिसने पूरे मामले को गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है। जारी पत्र में वार्ड-45 नौगढ़, पोस्ट कचनी निवासी शिकायतकर्ता राजेश सोनी को सूचित किया गया है कि उनकी ओर से 16 दिसंबर 2025 को प्राप्त शिकायत को संज्ञान में लिया गया है। विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायत की पुष्टि के लिए शिकायतकर्ता को निर्धारित सत्यापन प्रपत्र भरकर, अपनी पहचान का स्वप्रमाणित दस्तावेज संलग्न कर 15 दिनों के भीतर भेजना होगा। पत्र में यह भी साफ संकेत दिया गया है कि यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि शिकायत वास्तव में संबंधित व्यक्ति द्वारा ही की गई है।
शिकायत के 46 दिन बाद भी जांच प्रक्रिया शून्य
जानकारों का कहना है कि यदि विजिलेंस विभाग वास्तव में निष्पक्ष होता, तो अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी होती। यह भी स्पष्ट किया जाता कि फॉर्म वेट ट्रैक इंडिया लिमिटेड पर क्या कार्रवाई की गई। लेकिन चुप्पी यह संकेत दे रही है कि कहीं न कहीं बड़े स्तर पर संरक्षण दिया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता राजेश सोनी ने अब जांच का दायरा और व्यापक करने की मांग की है। उन्होंने कोयला मंत्री और निदेशक सीबीआई को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की केंद्रीय स्तर से जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय और परियोजना स्तर पर निष्पक्ष जांच की कोई उम्मीद नहीं बची है। सिंगरौली पहले ही कोयला उत्पादन के साथ-साथ विवादों का केंद्र रहा है। ऐसे में करोड़ों के इस कथित घोटाले पर प्रशासनिक चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है।
