योगी सरकार के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां, घाट संचालक को मिला विभागीय संरक्षण?
संवादाता – हिमांशु
Crime Jalaun जालौन (उ.प्र.) – कालपी–महेवा ब्लॉक क्षेत्र के सिमरा शेखपुर में अवैध बालू खनन और बिना खनिज प्रपत्रों के परिवहन का खेल खुलेआम चल रहा है। खनन माफिया एकांत का फायदा उठाकर ओवरलोड ट्रकों से बालू ढुलाई करा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
क्षेत्र में अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। कदौरा क्षेत्र में वर्षों से चल रहे इस खेल ने अब महेवा ब्लॉक में भी पैर पसार लिए हैं। वेतवा नदी की तर्ज पर अब यमुना नदी को भी खनन माफिया निशाना बना रहे हैं। इसकी बानगी सिमरा शेखपुर बालू घाट पर साफ देखी जा सकती है, जहां शासन द्वारा सोनभद्र की एक कंपनी को 11 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई है।
हालांकि खनन शुरू हुए अभी महज एक माह ही हुआ है, लेकिन घाट संचालक ने नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन और अवैध परिवहन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की नजरों से बचने के लिए घाट संचालक ने यमुना किनारे से सीधे पाल गांव के पास स्थित यमुना पुल तक गुप्त रास्ता बना लिया है। इसी रास्ते से ओवरलोड ट्रक बिना किसी जांच-पड़ताल के सीधे कानपुर देहात की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।
बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल रात के अंधेरे में शुरू होता है और सुबह होते ही सब कुछ सामान्य दिखने लगता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इलाके के एकांत होने और तहसील व जिला सीमा के पास होने के कारण प्रशासन की निगरानी यहां नहीं हो पाती, जिसका फायदा बालू माफिया भरपूर उठा रहे हैं।
ओवरलोड बालू ट्रकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद न तो परिवहन विभाग ने कोई कार्रवाई की और न ही खनन विभाग ने संज्ञान लिया। इससे दोनों विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रीय जनता का मानना है कि बालू कारोबारियों को विभागीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, इसी वजह से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अवैध खनन से सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई जा रही है।
ग्रामीणों की आवाजाही पर प्रतिबंध, बंदूकधारी गुर्गों का डर
अवैध खनन पर नजर न पड़े, इसके लिए घाट संचालक ने ग्रामीणों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। खेतों पर जाने वाले ग्रामीणों को रोका जाता है और विरोध करने पर गुर्गे धमकाते हैं। ग्रामीणों में भय का माहौल है।
अंधेरा होते ही शुरू होता है ओवरलोडिंग का खेल
दिन में सब कुछ सामान्य और रात में ओवरलोड ट्रकों की कतारें। अवैध परिवहन को छिपाने के लिए अंधेरे का सहारा लिया जा रहा है।
तय सीमा से बाहर और नदी की धारा में खनन
शासन द्वारा तय 11 हेक्टेयर क्षेत्र की सीमा के बाहर और नदी की जलधारा से भी खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान और राजस्व की चोरी हो रही है।
पुलिस का पहरा, मगर किसके लिए?
घाट पर नियमों की निगरानी के बजाय न्यामतपुर चौकी पुलिस का पहरा लगाया गया है, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति वहां पहुंच न सके और गड़बड़ी उजागर न हो पाए।
