A sea of faith gathers at the Sangam banks: The Paush Purnima bath marks the grand opening of the Magh Mela-202, with over 3.1 million people taking the holy dip.
कड़ाके की ठंड और कोहरे को मात देती आस्था | पहले स्नान पर्व पर देशभर से उमड़े श्रद्धालु, सुरक्षा व व्यवस्थाएं रहीं अभूतपूर्व
ब्यूरो रिपोर्ट
Magh Mela 2026 : कुंभ प्रयागराज।- मोक्षदायिनी त्रिवेणी के पावन तट पर पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला–2026 का आगाज अभूतपूर्व आस्था और अनुशासन के साथ हुआ। शीतलहर, घना कोहरा और कंपकंपाती ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डिगी नहीं। आधी रात के बाद से ही संगम क्षेत्र में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा और सूर्योदय के साथ पुण्य स्नान का सिलसिला तेज हो गया। मेला प्रशासन के अनुसार, पहले स्नान पर्व पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही संगम नोज सहित 10 प्रमुख घाटों पर एक साथ स्नान की व्यवस्था की गई। लाल सड़क, काली सड़क, अक्षयवट और त्रिवेणी मार्ग से होते हुए श्रद्धालु कतारबद्ध ढंग से घाटों तक पहुंचे। संगम की लगभग 2.8 किलोमीटर लंबी घाट श्रृंखला पर देर रात तक स्नान का क्रम चलता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा मेला क्षेत्र हर-हर गंगे और जय मां गंगा के उद्घोष से गूंज उठा।
कल्पवास का आरंभ, साधना में लीन संत-
पौष पूर्णिमा के साथ ही कल्पवास परंपरा का भी विधिवत आरंभ हुआ। साधु-संतों और कल्पवासियों ने गंगा स्नान के बाद गणेश पूजन किया, तुलसी का बिरवा रोपा और गंगा की मिट्टी में जौ बोकर संकल्प लिया। संगम की रेती पर दीपदान, दुग्धाभिषेक और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

प्रशासनिक तैयारियों की दिखी झलक-
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को कई जोन और सेक्टर में बांटा था। वन-वे ट्रैफिक प्लान लागू कर आवागमन को सुचारु रखा गया। दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहा।
सुरक्षा के लिए—
1500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
ड्रोन कैमरों के जरिए पल-पल की तस्वीर
संगम नोज पर वॉच टावर, जल पुलिस और एनडीआरएफ की सतत पेट्रोलिंग
पब्लिक एड्रेस सिस्टम से श्रद्धालुओं को लगातार दिशा-निर्देश
स्वास्थ्य और सुविधाओं का पुख्ता इंतजाम-
ठंड के मद्देनज़र संगम क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और चिकित्सकों की टीमें तैनात रहीं। अलाव, गर्म पानी और विश्राम स्थलों की पर्याप्त व्यवस्था की गई। नगर निगम और स्वच्छता कर्मियों ने घाटों और मार्गों पर दिनभर सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता बनाए रखी।
भंडारा, पदयात्रा और सांस्कृतिक रंग-
पौष पूर्णिमा पर श्री मठ बाघंबरी गद्दी में महंत बलवीर गिरि जी महाराज के सान्निध्य में 24 घंटे का भंडारा प्रारंभ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
वहीं बिहार के वैशाली निवासी अक्षत सिंह 26 महीनों में 15 हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा कर संगम स्नान को पहुंचे। उनकी साधना और संकल्प ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।
माघ मेला अब केवल स्नान तक सीमित नहीं रहेगा। संस्कृति विभाग के तत्वावधान में लोक और शास्त्रीय संगीत, नृत्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
श्रद्धालुओं ने सराही व्यवस्थाएं-
देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं और कल्पवासियों ने मेला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। उनका कहना था कि सुरक्षा, स्वच्छता और स्नान व्यवस्था ने आस्था को और सुदृढ़ किया है।
निष्कर्षतः, पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व ने माघ मेला–2026 को भव्य शुरुआत दी है। संगम तट पर उमड़ा आस्था का जनसागर यह संदेश देता है कि ठंड, दूरी और कठिनाइयों से परे भारतीय जनमानस की श्रद्धा आज भी उतनी ही जीवंत और अटूट है।
