Meja CHC doesn’t treat, it’s treating allegations! The public is fed up with corruption, arbitrariness, and threats.
अधूरी एक्स-रे रिपोर्ट, मरीजों से दुर्व्यवहार, पत्रकार को फंसाने की साजिश का आरोप—अधीक्षक शमीम अख्तर और एक महिला कर्मचारी सवालों के घेरे में, उच्च अधिकारी मौन
संवाददाता – आलोपी शंकर शर्मा
CHC Meja Prayagraj मेजा, प्रयागराज। मेजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और मनमानी के आरोपों के लिए चर्चा में है। केंद्र के अधीक्षक शमीम अख्तर पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि उनकी कार्यशैली के चलते यह अस्पताल जनता के लिए राहत का केंद्र नहीं, बल्कि परेशानी का अड्डा बन गया है। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेजा सीएचसी अब सिर्फ नाम भर का रह गया है। सरकारी रिकॉर्ड में सुविधाएं भले ही पूरी दिखाई जाती हों, लेकिन हकीकत में मरीजों को बुनियादी इलाज के लिए भी भटकना पड़ रहा है। इलाज के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है और सबसे चौंकाने वाला मामला एक्स-रे जांच से जुड़ा है।
अधूरी एक्स-रे रिपोर्ट, मरीजों की सेहत से खिलवाड़

मरीजों का आरोप है कि एक्स-रे जांच के बाद उन्हें पूरी रिपोर्ट नहीं दी जा रही, बल्कि आधी-अधूरी रिपोर्ट थमा दी जाती है। इससे डॉक्टर भी सही इलाज तय नहीं कर पाते और मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है। सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अस्पताल में यह लापरवाही क्यों? क्या यह जानबूझकर किया जा रहा है, ताकि मरीज बाहर जांच कराने को मजबूर हों?
पत्रकार को फंसाने की साजिश का आरोप
मामला तब और गंभीर हो गया जब एक महिला कर्मचारी द्वारा एक पत्रकार को अश्लील हरकत के झूठे आरोप में फंसाने की कथित साजिश सामने आई। आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाने से बौखलाए प्रबंधन ने सच दबाने के लिए यह हथकंडा अपनाया। सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी वीडियो को वायरल बताकर पूरे मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश भी की जा रही है।
स्थानीय पत्रकारों और लोगों का कहना है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल पूछे गए तो अधीक्षक के इशारे पर महिला कर्मचारी द्वारा पत्रकार को खुलेआम धमकियां दी गईं। यह न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह दर्शाता है कि सवाल पूछना यहां अपराध बनता जा रहा है।
सरकारी दावों की खुलती पोल
एक ओर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रयागराज के मेजा सीएचसी की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जनता सवाल कर रही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग को जातीय समीकरण और मनमानी के आधार पर चलाया जाएगा? क्या गरीब और जरूरतमंद मरीजों के स्वास्थ्य के साथ इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा?
उच्च अधिकारियों की चुप्पी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद उच्च अधिकारी अरुण तिवारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। क्या यह चुप्पी विभागीय संरक्षण का संकेत है, या फिर जनता की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है?
मेजा सीएचसी को लेकर उठे इन सवालों ने पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब कार्रवाई करता है, या फिर जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से पूरी तरह टूट जाएगा।
