Overloaded trucks flouting no-entry rules in Prayagraj Shankargarh: Vehicles carrying gravel made life difficult for villagers.
अल्ट्राटेक से दिन–रात बेधड़क चल रही भारी गाड़ियां; धूल, प्रदूषण और हादसों का खतरा बढ़ा — थाना प्रभारी की निगरानी व ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
संवाददाता –
Prayagraj Shankgharh – प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में राखड़ (फ्लाई ऐश) ढोने वाले ओवरलोड ट्रकों की अवैध आवाजाही ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नो एंट्री के स्पष्ट प्रावधान के बावजूद अल्ट्राटेक कंपनी से निकलने वाले भारी वाहन दिन-रात लगातार सड़कों पर दौड़ते दिख रहे हैं, जिससे नियमों की खुली अनदेखी सामने आ रही है।
शिवराजपुर से गढ़ कटरा की ओर जाने वाला मार्ग इन दिनों राखड़ की उड़ती धूल से सफेद होता जा रहा है। लगातार ट्रकों की आवागमन से सड़कें धूल से पट जाती हैं, जिससे राहगीरों की आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और घरों के अंदर तक राखड़ भरने जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों ने साफ कहा है कि यह स्थिति अब सहनशक्ति से बाहर हो चुकी है।
पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल –
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नो एंट्री लागू होने के बावजूद ट्रकों का बेखौफ आवागमन, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि—
जब हजारों ट्रक रोज़ गुजर रहे हैं, तो थाना प्रभारी शंकरगढ़ और ट्रैफिक विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ती?
क्या यह लापरवाही है, अनदेखी है, या फिर शिकायतों को गंभीरता से न लेने की प्रवृत्ति?
इस स्थिति के चलते सड़क हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रकों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग से छोटे वाहनों व पैदल राहगीरों की सुरक्षा खतरे में है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया उलझन बढ़ा रही –
मामले में जब एसडीएम बारा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।
वहीं एसीपी बारा ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने दिन-रात भारी वाहनों के संचालन की कोई अनुमति नहीं दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह साबित कर रही है कि ट्रक मालिकों और ड्राइवरों पर अभी तक कोई ठोस अंकुश नहीं लगाया गया।
ग्रामीणों की कड़ी मांग –
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से यह मांग रखी है कि— या तो भारी वाहनों की आवाजाही तुरंत रोकी जाए,
अथवा इस मार्ग को ही बंद कर दिया जाए, ताकि लोगों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सुरक्षित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
