भ्रष्टाचार की ‘जहरीली’ राजनीति: डगा में खरीदी जमीन पर कमीशन न मिलने से तिलमिलाए भरत सिंह! फैला रहे झूठी अफवाह
सिंगरौली (बरगवां)। जिले के ग्राम डगा (बरगवां) में एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ निजी स्वार्थ और ‘अवैध कमीशन’ की भूख ने एक परिवार की पूरी साख पर कीचड़ उछालने की कोशिश की है। स्थानीय निवासी भूमि स्वामी की वैध और खरीदी जमीन को भरत सिंह नामक व्यक्ति द्वारा ‘फर्जी’ बताकर सनसनी फैलाने का घिनौना खेल खेला जा रहा है।
कमीशन की ‘हवस’ ने बनाया अफवाहों का सौदागर?
पीड़ित भूमि स्वामी ने दो-टूक शब्दों में आरोप लगाया है कि उनकी जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह वैध और खरीदी है। सूत्रों की मानें तो डगा क्षेत्र में जमीन का सौदा होते ही भरत सिंह सक्रिय हो जाते हैं और ‘मोटा कमीशन’ न मिलने पर उसे फर्जी बताकर बदनाम करना शुरू कर देते हैं। जब भूमि स्वामी ने इस अनैतिक मांग के आगे घुटने नहीं टेके, तो आरोपी ने प्रशासन को गुमराह करने और झूठी शिकायतें करने का सहारा लिया।
प्रशासनिक जांच में खुली पोल: पंचनामे से पीठ दिखाकर भागे भरत सिंह!
विवाद की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम (SDM) देवसर ने एक विशेष टीम गठित कर जांच करवाई थी। राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर आधुनिक उपकरणों से सीमांकन किया और दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि:
जांच में जमीन के दस्तावेज पूरी तरह वैध पाए गए।
जब सच्चाई सामने आई और पंचनामा तैयार हुआ, तो वहां मौजूद सभी ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए।
लेकिन जैसे ही भरत सिंह की ‘झूठी शिकायत’ की पोल खुली, उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और मौके से भाग खड़े हुए।
तहसीलदार के आदेश ने लगाई सच्चाई पर मुहर
राजस्व आदेश पत्र (मामला क्र. 0197/अ-12/2024-25) और ३१ दिसंबर २०२४ की सीमांकन रिपोर्ट इस बात का पुख्ता सबूत है कि जमीन अब शिव शंकर शाह और रमेश शाह की है। तहसीलदार बरगवां के न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमांकन की पुष्टि की जाती है और कोई भी वैध आपत्ति नहीं पाई गई है।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन इन ‘अड़ंगाबाजों’ पर करेगा वार?
एक तरफ सरकार पारदर्शिता की बात करती है, दूसरी तरफ भरत सिंह जैसे लोग प्रशासनिक प्रक्रिया का मजाक उड़ा रहे हैं। जांच दल की रिपोर्ट को न मानना और हस्ताक्षर से मुकरना यह साबित करता है कि इनका उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि केवल ब्लैकमेलिंग और कमीशनखोरी है। पीड़ित भूमि स्वामी ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अफवाह फैलाने वालों और भू-माफिया मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
खबर का सार: अपनी ही खरीदी जमीन बेचने के लिए क्या अब भ्रष्ट मानसिकता वालों को ‘हफ्ता’ देना होगा? प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद भी अफवाह फैलाना सीधे-सीधे कानून को चुनौती देना है।
