सिंगरौली। जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक गंभीर घटना सामने आई, जहां कथित रूप से हथियारबंद आरोपियों ने पुलिस थाना परिसर से शासकीय अभिरक्षा में खड़े अवैध रेत से भरे टिपर वाहन को छुड़ा लिया। घटना के बाद क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनघड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में पदस्थ वनरक्षक शुभम सिंह चौहान को सूचना मिली थी कि सोन नदी के पनवार घाट से अवैध रूप से रेत परिवहन किया जा रहा है। वन विभाग की टीम ने ग्राम कुसहनिया के पास वाहन क्रमांक UP64T0381 को रोका। चालक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद वाहन को जब्त कर थाना चितरंगी लाया जा रहा था।
थाना गेट पर हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि रात लगभग 12:30 बजे जब जब्त टिपर को थाना परिसर में प्रवेश कराया जा रहा था, उसी समय कुछ लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने हथियार दिखाकर वनकर्मियों को धमकाया और शासकीय कार्य में हस्तक्षेप किया। इसके बाद आरोपियों ने जब्त वाहन को जबरन अपने कब्जे में लेकर वहां से रवाना हो गए। घटना के दौरान कथित रूप से थाना परिसर के गेट को भी क्षति पहुंची। सूत्रों के अनुसार घटना के समय डायल-100 वाहन थाना के बाहर मौजूद था। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई
वन विभाग की ओर से लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें मारपीट, धमकी और शासकीय कार्य में बाधा जैसे आरोप शामिल हैं। मामले में एसडीओपी राहुल कुमार ने बताया कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उनके विरुद्ध संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
जिले में अवैध रेत उत्खनन का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी जियावान थाना परिसर से जप्त वाहन चोरी होने की घटना सामने आ चुकी है, जिससे रेत माफियाओं के बढ़ते प्रभाव की चर्चा तेज हो गई है। कानून व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं थाना परिसर में घुसकर वाहन छुड़ा ले जाने की घटना को कानून व्यवस्था पर सीधा हमला माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब थाना ही सुरक्षित नहीं है तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
अवैध रेत खनन पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
चितरंगी एवं आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हालिया घटना के बाद एक बार फिर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अवैध रेत परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।
