सिंगरौली (विंध्यनगर): शिक्षा के क्षेत्र में नामी और भारी-भरकम फीस वसूलने वाले स्कूल दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) विंध्यनगर से एक गंभीर मामला सामने आया है। अभिभावकों और छात्रों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में आयोजित कक्षा 12वीं की भौतिक विज्ञान (Physics) बोर्ड प्रायोगिक परीक्षा 2025-26 में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
प्रैक्टिकल फाइल से ‘नकल’ की खुली छूट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, PTA (अभिभावक-शिक्षक संघ) को लिखे गए पत्र में छात्रों ने खुलासा किया है और सूत्रों का दावा हैं कि परीक्षा के दौरान कई परीक्षार्थियों को खुलेआम उनकी प्रैक्टिकल फाइल्स से उत्तर देखकर लिखने की अनुमति दी गई। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि वहां मौजूद दो PGT फिजिक्स शिक्षकों ने न केवल इसे अनदेखा किया, बल्कि छात्रों को ऐसा करने के लिए निर्देशित भी किया।
प्राचार्य जनार्दन पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल
अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ स्कूल प्रबंधन लाखों रुपये फीस डकार रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षाओं की पारदर्शिता पूरी तरह से शून्य बनी हुई है। प्राचार्य जनार्दन पांडेय के नेतृत्व में विद्यालय की व्यवस्था चरमरा गई है। अभिभावकों का आरोप है कि प्राचार्य स्कूल की अनुशासनिक व्यवस्था और सीबीएसई (CBSE) के कड़े नियमों को लागू करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
ईमानदार छात्रों में भारी असंतोष
इस घटना ने उन मेधावी छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरा आघात पहुँचाया है जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा की तैयारी की थी। अभिभावकों का तर्क है:
असमानता: जब कुछ छात्रों को नकल की छूट मिलती है, तो मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूटता है।
भविष्य से खिलवाड़: बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता भंग होने से छात्रों के भविष्य और शिक्षा पद्धति पर से विश्वास उठता है।
प्रबंधन की विफलता: लाखों की फीस लेने वाले संस्थान में ऐसी अराजकता प्रबंधन की मिलीभगत या अक्षमता को दर्शाती है।
जांच की मांग
अभिभावकों ने PTA सचिव से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रबंधन अपनी छवि बचाने के लिए क्या कदम उठाता है या प्राचार्य जनार्दन पांडेय इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।
नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों का दावा है कि CBSE की नकल शिकायत पर प्राचार्य ने गोलमोल जवाब देकर मामला दबाया और CCTV सबूत भी गायब कराए — अब सवाल यह नहीं कि नकल हुई या नहीं, सवाल यह है कि जांच से ज्यादा तेज़ ‘डिलीट बटन’ कैसे चला? जो भी ये उच्च स्तरीय जांच का विषय है लेकिन आरोप गंभीर है
डीपीएस विंध्य नगर के प्रिंसिपल जनार्दन पांडेय से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
