कोयला परिवहन में लगे वाहन चालकों से गिरोह बनाकर हो रही अवैध वसूली
सिंगरौली। जिले में कोयला खदानों से कोयले का परिवहन करने वाले ट्रक चालकों से खुलेआम अवैध वसूली का खेल जारी है। वाहन चालक और वाहन स्वामी कई बार पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के सुरक्षा प्रबंधन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक वसूली गिरोह पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। चालकों का आरोप है कि जैसे ही रात होती है, जयंत, निगाही और आसपास के खनन क्षेत्रों में गिरोह सक्रिय हो जाता है। लोग समूह बनाकर वाहनों के पास पहुंचते हैं और पैसे न देने पर डीजल निकालने, बैटरी चोरी करने और वाहन तोड़फोड़ की धमकी देते हैं।
नाबालिगों को बनाया जा रहा वसूली का जरिया
वाहन चालकों के अनुसार गिरोह का सरगना जानबूझकर 15 से 17 वर्ष के नाबालिग लड़कों को आगे करता है, ताकि पुलिस कार्रवाई से बचा जा सके। कम पैसों का लालच देकर बच्चों को इस अवैध धंधे में धकेला जा रहा है। बताया जा रहा है कि बीते तीन-चार वर्षों से यह वसूली लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।
प्रति वाहन 200 से 300 रुपये की उगाही
जयंत व आसपास की कोल खदानों में प्रतिदिन हजारों वाहन कोयला लोड करने पहुंचते हैं। इनमें से अधिकांश चालक दूसरे जिलों और राज्यों से आते हैं, जिन्हें निशाना बनाकर हर वाहन से 200 से 300 रुपये वसूले जा रहे हैं मना करने पर मारपीट और वाहन क्षति की जा रही है। चालकों का कहना है कि यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है और सबकुछ संबंधित अमले की जानकारी में होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
कोयला परिवहन से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह गिरोह और अधिक संगठित होकर बड़ी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकता है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इस वसूली नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा? या फिर कोयला परिवहन करने वाले चालक इसी तरह डर के साए में काम करने को मजबूर रहेंगे?
