कलेक्ट में बैठा बाबू और यूपी के पटवारी के पार्टनर के आगे जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही शून्य..?
सिंगरौली में डायग्नोस्टिक सेंटर पर लूट के आरोप, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल..
अल्ट्रासाउंड में मनमानी वसूली, बिना रेडियोलॉजिस्ट जांच का आरोप; मरीजों की सुविधाएं भी नदारद..?
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर स्थित साईं डायग्नोस्टिक सेंटर इन दिनों कथित मनमानी वसूली और अव्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में है। स्थानीय मरीजों और उनके परिजनों ने सेंटर संचालक पर न केवल अधिक शुल्क वसूलने, बल्कि लापरवाहीपूर्वक जांच करने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
अल्ट्रासाउंड के नाम पर वसूली..?
मरीजों का आरोप है कि सेंटर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए तय दरों से कहीं अधिक शुल्क लिया जा रहा है। जहां सामान्यतः यह जांच 600 से 800 रुपये में हो जाती है, वहीं कुछ मरीजों से 1200 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, सेंटर में रेट लिस्ट तक प्रदर्शित नहीं होने से मरीजों को मजबूरी में मनमानी रकम चुकानी पड़ रही है।
बिना विशेषज्ञ के जांच का आरोप..?
सूत्रों के अनुसार सेंटर में नियमित रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता नहीं रहती। आरोप है कि कई बार प्रशिक्षित डॉक्टर के बजाय अन्य कर्मचारी ही मशीन संचालित करते हैं। यदि यह सही पाया जाता है तो यह नियमों का गंभीर उल्लंघन होने के साथ मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अनुभवहीन स्टाफ, गलत रिपोर्ट की आशंका.? मरीज लोगों का कहना है कि सेंटर में काम कर रहे कर्मचारियों को बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मरीजों के नाम दर्ज करने में भी गलतियां सामने आई हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुविधाओं का अभाव..
सेंटर में मरीजों और उनके परिजनों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों को घंटों बाहर इंतजार करना पड़ता है। साथ ही पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से सड़क पर जाम की स्थिति बन रही है।
लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी कटघरे में है। लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण होता, तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या मरीजों को राहत मिल पाती है या नहीं…
