सिंगरौली। भारतीय जनता पार्टी, जो खुद को विश्व की सबसे बड़ी और अनुशासित पार्टी होने का दंभ भरती है, आज सिंगरौली जिले में अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच सवालों के घेरे में है। जिले के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा आम है— “सिंगरौली भाजपा में वही होगा, जो ‘अदृश्य नेत्री’ चाहेंगी।” यह आरोप किसी विपक्षी दल का नहीं, बल्कि खुद भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का है, जो पार्टी के भीतर चल रही इस गुटबाजी और ‘रिमोट कंट्रोल’ वाली कार्यप्रणाली से बेहद आहत हैं।
रिमोट कंट्रोल वाली सियासत: आखिर कौन है वह ‘अदृश्य नेत्री’?
पार्टी के भीतर यह सुगबुगाहट तेज है कि जिला संगठन के अहम फैसले अब जिले के कार्यालय से नहीं, बल्कि एक ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर लिए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि जिला अध्यक्ष पूरी तरह से रिमोट कंट्रोल की भूमिका में हैं। संगठन में किसे कौन सा पद देना है, किसकी ताजपोशी करनी है और किसे हाशिए पर धकेलना है—यह सब वह अदृश्य नेत्री ही तय कर रही हैं। हालांकि, डर और अनुशासन की बेड़ियों में जकड़े कार्यकर्ता फिलहाल उस नेत्री का नाम सार्वजनिक करने से कतरा रहे हैं, लेकिन उनकी नाराजगी दबी जुबान में उबाल मार रही है।
कार्यकर्ताओं का फूट रहा लावा, संगठन में बिखराव के संकेत
सूत्रों की मानें तो जिला अध्यक्ष और इस अदृश्य महिला के हस्तक्षेप से जमीनी कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वर्षों से पार्टी को खून-पसीने से सींचने वाले नेताओं को दरकिनार कर ‘पसंदीदा’ लोगों को उपकृत करने की यह नीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि संगठन के मुखिया ही किसी के हाथ की कठपुतली बन जाएंगे, तो कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान की रक्षा कौन करेगा?
पार्टी का ‘अंदरूनी’ मामला या लोकतंत्र का मजाक?
निश्चित रूप से यह भाजपा का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन जिस तरह से एक अनाम शक्ति ने पूरी जिला इकाई को अपने शिकंजे में ले रखा है, उसने भाजपा की साख पर बट्टा लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या वरिष्ठ नेतृत्व इस ‘अदृश्य नेत्री’ के प्रभाव से अनजान है या फिर मौन रहकर इस गुटबाजी को शह दी जा रही है?
निष्कर्ष: सिंगरौली भाजपा में पनप रहा यह असंतोष किसी बड़े धमाके की आहट है। यदि समय रहते जिला संगठन ने अपनी स्वायत्तता बहाल नहीं की और कार्यकर्ताओं का विश्वास नहीं जीता, तो ‘अदृश्य नेत्री’ का यह मोह पार्टी को भारी पड़ सकता है।
