पिपरा झांपी पंचायत बनी सरकारी धन की लूट का अड्डा, 50 हजार का टेंट सिर्फ कागजों में
सिंगरौली जिले की ग्राम पंचायत पिपरा झांपी जनपद पंचायत वैढन अब विकास की नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली लूट की पहचान बनती जा रही है। पंचायत में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो यह साबित करते हैं कि यहां योजनाएं जमीन पर नहीं, सिर्फ फाइलों में चल रही हैं।
ताजा मामला पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज ₹52,000 के टेंट खर्च का है। हैरानी की बात यह है कि गांव के किसी भी व्यक्ति को आज तक यह पता नहीं कि यह टेंट कहां लगाया गया, कब लगाया गया और किस कार्यक्रम के लिए लगाया गया। न तो गांव में ऐसा कोई बड़ा आयोजन हुआ, न कोई सरकारी कार्यक्रम और न ही किसी सार्वजनिक स्थान पर टेंट लगाए जाने का कोई प्रमाण मौजूद है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर सच में टेंट लगाया गया होता तो उसकी जानकारी ग्राम सभा में दी जाती, पंचायत प्रस्ताव पास होता, सूचना चस्पा की जाती या कम से कम फोटो और गवाह मौजूद होते। लेकिन यहां तो स्थिति यह है कि खर्च तो दिखा दिया गया, पर काम का कोई नामोनिशान नहीं।
यह पूरा मामला साफ संकेत देता है कि पंचायत में कागजों के सहारे सरकारी पैसों की बंदरबांट की जा रही है। बिना ग्राम सभा की अनुमति, बिना पारदर्शिता और बिना जवाबदेही के इस तरह का खर्च दिखाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जनता के भरोसे के साथ सीधी धोखाधड़ी भी है।
अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन, कलेक्टर कार्यालय सिंगरौली, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और प्रदेश सरकार इस लूट पर कब संज्ञान लेगी? या फिर पिपरा झांपी पंचायत यूं ही भ्रष्टाचार का गढ़ बनी रहेगी।
